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सीतापुर ,सुनिश्चित हो कि एमडीए के दौरान, कोई भी लाभार्थी दवा से वंचित न हो.

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सीतापुर ,सुनिश्चित हो कि एमडीए के दौरान, कोई भी लाभार्थी दवा से वंचित न हो 

- सूबे के स्वास्थ्य मंत्री लखीमपुर खीरी जिले में करेंगे उद्घााटन


सीतापुर, 10 जुलाई। प्रदेश के 12 जनपदों में 12 जुलाई से मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (आईडीए) कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। जिसका उदघाटन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह द्वारा जनपद लखीमपुर खीरी से किया जायेगा, जिसमें आईडीए जनपदों के स्वास्थ्य अधिकारी और अन्य विभागीय अधिकारी भी वर्चुअल रूप से जुड़ेंगे। 

इस संबंध में फाइलेरिया रोग के उन्मूलन हेतु उत्तर प्रदेश में कोविड-19 के दिशा-निर्देशों के अनुसार शारीरिक दूरी (दो गज की दूरी), मास्क और हाथों की साफ़-सफाई का अनुपालन करते हुए समुदाय को फाइलेरिया या हाथीपांव रोग से बचाने के लिए शुरू किये जा रहे मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (आईडीए) कार्यक्रम के सम्बन्ध में मीडिया की सक्रिय एवं महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा करने हेतु स्वास्थ्य विभाग की सहयोगी संस्थाएं बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन, विश्व स्वास्थ्य संगठन, केयर , प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल, पाथ , सीफार और ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज के साथ मीडिया कर्मियों की एक कार्यशाला आयोजित की गई। 

इस अवसर पर मलेरिया विभाग के अपर निदेशक डॉ. विन्दु प्रकाश सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार फाइलेरिया व कालाजार रोग के उन्मूलन के लिए अत्यंत संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन गतिविधियों का संचालन कोविड-19 के मानकों का पालन करते हुए किया जाएगा, हाथ की स्वच्छता, मास्क और शारीरिक दूरी (दो गज की दूरी) शामिल हैं। उन्होंने सूचित किया कि इस अभियान में सभी वर्गों के लाभार्थियों को फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए डी.ई.सी. ,अल्बंडाज़ोल तथा आईवरमेक्टिन की निर्धारित खुराक स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर, अपने सामने मुफ्त खिलाई जाएगी एवं किसी भी स्थिति में, दवा का वितरण नहीं किया जायेगा। 2 साल से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को ये दवाएं नहीं खिलाई जाएगी। इस दवा का सेवन खाली पेट नहीं करना है। डॉ. सिंह ने यह भी बताया कि रक्तचाप, शुगर, अर्थरायीटिस या अन्य सामान्य रोगों से ग्रसित व्यक्तियों को भी ये दवाएं खानी हैं। सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। किसी को दवा खाने के बाद उल्टी, चक्कर, खुजली या जी मिचलाने जैसे लक्षण होते हैं तो यह इस बात का प्रतीक हैं कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के कृमि मौजूद हैं,जो दवा खाने से नष्ट हो जाते हैं जिसके कारण शरीर में ऐसे लक्षण उत्पन्न होते हैं। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य एनटीडी समन्वयक डॉ. तनुज शर्मा ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग, सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या है। इससे शारीरिक अंगों में असामान्य सूजन होती है। फाइलेरिया के कारण चिरकालिक रोग जैसे; हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन), लिम्फेडेमा (अंगों की सूजन) व काइलुरिया (दूधिया सफेद पेशाब) से ग्रसित लोगों को अक्सर सामाजिक बोझ सहना पड़ता है, जिससे उनकी आजीविका व काम करने की क्षमता भी प्रभावित होती है। कार्यशाला के बढ़ते क्रम में, बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के प्रतिनिधि डॉ. भूपेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि फ़ाइलेरिया उन्मूलन अभियान में इस बात का विशेष ध्यान देना है कि जो लोग, अभियान के दौरान घर पर नहीं हैं और दवा खाने से वंचित हो गए हैं, उनमें ऐसी भावना पैदा हो और उन्हें इस तरह जागरूक किया जाये कि वे घर वापस लौटने पर अपने गांव की आशा के पास जाएं औए अपने हिस्से की फाइलेरिया रोधी दवाएं खाएं। 

पाथ के प्रतिनिधि, डॉ. शोएब अनवर ने बताया कि फ़ाइलेरिया रोधी दवा खाने से फाइलेरिया रोग के बचाव के साथ ही हुकवर्म (शरीर में खून चूसने वाले कृमियों) और स्केबी रोग से भी बचाव होता है। 

प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल के प्रतिनिधि ध्रुव सिंह ने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के सम्बन्ध में जागरूकता फैलाने के लिए, प्रदेश के राशन डीलर्स, किसानों के समूहों, व्यापार मंडल, गन्ना मिल मालिकों और धार्मिक गुरुओं के माध्यम से समुदाय में जागरूकता फैलाई जा रही है। सीफार की प्रतिनिधि रंजना द्विवेदी ने कहा कि इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मीडिया की भूमिका बहुत सशक्त है क्योंकि समुदाय में प्रचार-प्रसार के माध्यम से जागरूकता अत्यंत शीघ्रता से फैलती है। उन्होंने कहा कि उपरोक्त 12 जिलों में स्थानीय मीडिया से भी समन्वय बनाकर कार्य किया जा रहा है ताकि, मीडिया के माध्यम से कार्यक्रम के संबंध में लोगों तक उचित और महत्त्वपूर्ण जानकारियां पहुंच सकें, इसके साथ ही उन्होंने कार्यशाला में उपस्थित और ऑफलाइन जुड़े मीडिया सहयोगियों से अनुरोध किया कि जिलों से फाइलेरिया बीमारी से संक्रमित मरीजों की मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती हुई कहानियां प्रकाशित करें।

इनसेट ---

इन जिलों में चलेगा अभियान ---

मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (आईडीए) कार्यक्रम प्रदेश के 12 जिलों वाराणसी, चंदौली, मिर्ज़ापुर, कानपुर देहात, प्रयागराज, प्रतापगढ़, कानपुर नगर, हरदोई, सीतापुर, फतेहपुर, लखीमपुर खीरी एवं उन्नाव में 12 जुलाई से शुरू हो रहा है।

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