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बागपत,बसौद गांव में मनाया गया 164 वां शहादत दिवस.

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बागपत,बसौद गांव में मनाया गया 164 वां शहादत दिवस


- 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में बागपत के बसौद गांव के ग्रामवासियों ने देश के लिये दी थी सैंकड़ो कुर्बानियां


-  देशवासियों को शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिये - मास्टर सत्तार अहमद


बागपत। विवेक जैन


युवा चेतना मंच बसौद के तत्वाधान में गांव बसौद में 164 वें शहादत दिवस के अवसर पर गांव के अमर शहीदों को याद किया गया और श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। 

देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति जब बागपत के बसौद गांव में पहुंची तो पूरे गांव के लोगों ने एकजुट होकर अंग्रेजों की विशाल फौज से संघर्ष किया, जिसमें गांव के सैंकड़ो लोगों ने अपने जीवन की कुर्बानियां दी। सहादत दिवस के अवसर पर बोलते हुए प्रसिद्ध समाजसेवी मास्टर सत्तार अहमद ने कहा कि हम सभी को देश के शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिये। आजादी तो हमें मिल गयी, लेकिन उस आजादी को पाने में हमने जो कुछ खोया है उसकी कल्पना तक नही की जा सकती। कहा कि हमें शहीदों की कुर्बानियों से मिली इस आजादी को अनमोल धरोहर मानते हुए, इस धरोहर की रक्षा करते हुए उनके आदर्शों पर चलकर देशहित में कार्य करने चाहिए। इस अवसर पर बोलते हुए एमजीएस अल अमन स्कूल की प्रधानाचार्य गुलिस्ता मुमताज ने देश के अमर सपूतों के बलिदान को सदैव स्मरण रखने की बात कही। कहा कि शहीदों की कुर्बानियों को कभी भुलाया नही जा सकेगा। शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने बच्चों में देशप्रेम की भावना जागृत करें। युवा समाजसेवी समीर अहमद ने कहा कि इन शहीदों के कारण ही हम सबको आजादी मिली है। हमारा सामूहिक दायित्व है कि हम समाज को देशभक्ति के प्रति जागरूक करें। देश के लिये मर मिटने की भावना प्रत्येक देशवासी में होनी चाहिए। कार्यक्रम के अंत में बसौद गांव के अमर शहीदों की याद में दो मिनट का मौन रखा गया। राष्ट्रगान के उपरान्त कार्यक्रम का समापन हुआ। इस मौके पर डॉ राजीव गुप्ता, विपुल जैन, डॉ ललित शर्मा, गुलजार आलम, वसीम, तसलीम, नसीम, नाजिम, सददाम, मयूर, गुड्डू, गुलजार, आजम बाबर, नयुम, तालिब, आकिब, वकील अहमद, युनुस आदि सैकड़ों की संख्या में ग्राम वासी उपस्थित थे।

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