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सिधौली ,झूठ पर सच की जीत है शहादत-ए-हुसैन.

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सिधौली ,झूठ पर सच की जीत है शहादत-ए-हुसैन


सिधौली। (9 मोहर्रम) 19 अगस्त शहादत ए हुसैन के सिलसिले में कस्बा बाड़ी में मदरसा सेक्रेड एकेडमी में मजलिस का आयोजन किया गया मजलिस का प्रारंभ मदरसे के प्रिंसिपल काजी निजामुद्दीन खुसरो निजामी ने यह पंक्तियां पढ़कर किया *तेरी शहादत की बरकते  हैं जो दीन रंगीन है जवां है। हुसैन इस्लाम की रगों में तेरा मुकद्दस लहू रवां हैं

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उन्होंने कहा कि आज के इस दौर में मुसलमानों को अपने ईमान को सलामत रखना कठिन हो गया है फिर भी अगर इस दौर के किसी भी मुसलमान से यह कहा जाए कि यजी़द जैसे व्यक्ति के हाथ पर बैअत

 कर लो तो मैं यह समझता हूं कि आज के दौर का कम दर्जा ईमान रखने वाला मुसलमान भी इस बात पर राज़ी ना होगा तो जा़हिर है कि  वह जात जो    नवासा-ए- रसूल है इमामे वक्त है जिसके कांधों पर शरीयते  मुहम्मदी की हिफ़ाज़त की जिम्मेदारी है वह यजी़द जैसे शराबी और अय्याश व्यक्ति के हाथ पर बैअत कैसे कर सकता है, यही वजह है कि इमाम आली मका़म ने यजी़द की बैअत से इन्कार किया और अपने घराने वालों की जानों को इस्लाम और इंसानियत के रास्ते में कुर्बान करना पसंद किया उन्होंने कहा कि कर्बला के मैदान में हजारों की फ़ौज से इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का  अपने 72 साथियों के साथ मुका़बला करना हमें यह शिक्षा देता है कि हर इंसान की जिम्मेदारी है कि उसके सामने चाहे जैसे हालात हों उनका हर अमल यह गवाही देता नज़र आना चाहिए कि वह व्यक्ति असत्य और सत्य,हिंसा और अहिंसा के बीच फर्क करता है ।

मजलिस में हाफिज मोबीन अहमद ने कर्बला के शहीदों की याद में मर्सिया ख्वानी की। काजी कुतुबुद्दीन रब्बानी ने नौहाख्वानी की । *मजलिस की सदारत सज्जादा नशीन सय्यद अजीजुल हसन मदनी मियां ने की*


      और संचालन  

काजी जियाउद्दीन जामी ने किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ सैयद आसिफ अली, ताहा फरीदी , नौमानअब्बासी,

उवैस आलम, हस्सान किदवई, उपस्थित रहे।

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