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हरदोई ,ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन,संडीला की तहसील यूनिट गठित.

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हरदोई ,ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन,संडीला की तहसील यूनिट गठित


हरदोई।ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन संडीला की तहसील इकाई का गठन करते हुए,

संडीला तहसील अध्यक्ष मुईज सागरी ने तहसील टीम गठित कर  पदाधिकारियो की घोषणा की।

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष अतुल कपूर व ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष अखिलेश सिंह को संडीला के पत्रकारों ने लाव लश्कर व फूल मालाओ से लादकर सम्मानित किया।

पत्रकारों की बैठक में मुख्य वक्ताओं ने  पत्रकारों को एकजुट संगठित रहने पर जोर दिया।

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के प्रांतीय सचिव श्री केजी गुप्ता के संरक्षण में हुआ प्रेस क्लब में पत्रकारों की बैठक का आयोजन हुआ।

ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन संडीला तहसील इकाई  की मनोनीत टीम में

संरक्षक डॉ केजी गुप्ता, अनुराग अस्थाना, विशेष आमंत्रित सदस्य देशराज शर्मा ,मोहम्मद अब्बास, मोहम्मद आरिफ, तहसील अध्यक्ष मुईद सागरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रभात अस्थाना, उपाध्यक्ष विजय शंकर द्विवेदी, सतीश कुमार त्रिपाठी, मंत्री लालचंद चौरसिया, रजनीकांत रोहित वर्मा ,यासिर कासमी तौहीद अहमद, संगठन मंत्री योगेश त्रिपाठी, कोषाध्यक्ष अनिल राठौर, सह कोषाध्यक्ष रितेश सिंह लकी, कार्यकारणी सदस्य अवनीश सिंह, अनिल शर्मा, विधि सलाहकार उदय प्रताप चौरसिया, ब्लॉक अध्यक्ष कोथावा बुद्धसेन सोनी, ब्लॉक अध्यक्ष भरावन मेवाराम मौर्य, बेहदर ब्लाक अध्यक्ष बाल्मीकि बर्मा मनोनीत किए गए।


स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान पत्रकारिता को ‘व्यवसाय’ नही बल्कि ‘मिशन’ का दर्जा प्राप्त था। ‘पत्रकारिता व्यवसाय नही मिशन’ का आदर्श वाक्य आज नारे में तब्दील होकर पत्रकारिता विषयक भाषणो में आक्रामक उत्प्रेरक बनकर रह गया है। उक्त विचार ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की प्रेस क्लब संडीला में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के लखनऊ मंडल के मंडल अध्यक्ष श्री अतुल कपूर ने पत्रकारों से कही। उन्होने पत्रकारों से  कहा की मीडिया लोकतंत्र को चौथा स्तम्भ है।उस  पर समाज को बदलने की जिम्मेदार  है। . मीडिया कोई भीड जुटाऊ जोकर नही है बल्कि एक जिम्मेदार माध्यम हैl जनमत का प्रवाह ही लोकतंत्र की जीवन शक्ति होता है और मीडिया जनमत निर्माण में अहम भूमिका निभाता है ।.स्वतंत्रता के संघर्ष में पत्रकारिता की महती भूमिका रही है। .तिलक, गांधी और राजाराम मोहन राय जैसे नेताओ ने पत्रकारिता को स्वतंत्रता प्राप्ति का औजार बनाया है। कई देशो में पत्रकारिता का विपक्ष का नेता जैसे अलंकारो से नवाज गया है। क्रांतिकारियों ने कलम को तलवार का विशेषण दिया है ।राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अहिंसक उपायो में सत्य की विजय के लिए अखबार को एक महत्वपूर्ण व अनिवार्य साधन माना है ।वह स्वयं कई पत्र पत्रिकाओ (हरिजन, हरिजन बंधू, हरिजन सेवक , नवजीवन,यंग इण्डिया ) के संपादक रहे। महात्मा गांधी ने स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई भी लड़ाई जिसका आधार आत्मबल हो अखबार की सहायता के बिना नही चलायीं जा सकती। . अहिंसक उपयों से सत्य की विजय के लिए अखबार एक अनिवार्य साधन है।  अतुल कपूर ने कहा कि  ..संविधान नही बल्कि समाज ने पत्रकारिता को चौथे स्तम्भ की मान्यता प्राप्त है। . चौथे स्तम्भ की यह जिम्मेदारी है की वह सजग प्रहरी की तरह तीनो स्तम्भो पर नजर रखे। यदि वह अपने कर्तव्यों के साथ न्याय नही करेगा तो त्रस्त जनता , दैनिक पाठक ,आम दर्शक किससे सच की उम्मीद करे। . निष्पक्षता पत्रकारिता का पहला मन्त्र है। .इस मन्त्र की सिद्धि के बिना पत्रकारिता का समस्त जाप निरर्थक है। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के हरदोई के जिला अध्यक्ष अखिलेश सिंह ने कहा कि पत्रकारिता आधुनिक सभ्यता का एक प्रमुख व्यवसाय है जिसमें समाचारों का एकत्रीकरण, लिखना, जानकारी एकत्रित करके पहुँचाना, सम्पादित करना और सम्यक प्रस्तुतीकरण आदि सम्मिलित हैं। आज के युग में पत्रकारिता के भी अनेक माध्यम हो गये हैं; जैसे - अखबार, पत्रिकायें, रेडियो, दूरदर्शन, वेब-पत्रकारिता आदि। बदलते वक्त के साथ बाजारवाद और पत्रकारिता के अन्तर्सम्बन्धों ने पत्रकारिता की विषय-वस्तु तथा प्रस्तुति शैली में व्यापक परिवर्तन किए।प्रेस क्लब सडीला  मे पत्रकार बैठक मे ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के प्रांतीय सचिव  केजी गुप्ता ने कहा है कि पत्रकारिता के क्षेत्र में आज पहले की अपेक्षा ज्यादा चुनौतियां है। पत्रकारिता के मूल्यों को सहेजकर काम करने से इन चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। उन्होने  ने कहा कि समय, काल और परिस्थितियों के आधार पर काम करने से हर क्षेत्र में कामयाबी मिलती है। समय के अनुसार हर व्यक्ति को ढलना चाहिए। उन्होंने कहा कि संडीला  की पत्रकारिता का स्वर्णिम इतिहास रहा है। पुराने समय में संडीला  के पत्रकारों ने निष्पक्ष पत्रकारिता कर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनायी है। संडीला  में कई ऐसे पत्रकार हुए हैं, जिन्होंने कभी किसी भी चीज से समझौता नहीं किया है।वर्तमान दौर के पत्रकारों को समाचार और विचार में अंतर करना सीखना पड़ेगा। समाचार घटनाओं पर आधारित और तथ्यात्मक होना चाहिए। समाचारों में विचारों का घालमेल होने से समाचारों का महत्व कम हो जाता है। विचारों के लिए समाचार पत्रों में अलग-अलग जगह होती है।

     संडीला तहसील इकाई के नवनियुक्त अध्यक्ष मुईज सागरी ने कहा कि पत्रकारिता की चुनौतियों का सामना करने के लिए संघर्ष करने की जरूरत है। संघर्ष में काम करने का एक अलग मजा है। संघर्ष से आत्म विश्वास बढ़ता है और सफलता सुनिश्चित होती है। विपरीत परिस्थितियों में सफल होने के लिए संघर्षशील होना चाहिए है। वर्तमान दौर के पत्रकारों को अपनी कमजोरियों को दूर कर आत्म विश्वास बढ़ाना जरूरी है। अमित मौर्या अनुराग अनुराग अस्थाना,संजय सिंह,  रजनीश, अजय कुमार सिंह, हिमान्सू समेत कई पत्रकार मौजूद रहे।

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