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शाहजहांपुर ,कलान में लगभग 16 लाख के घोटाले में एडीओ पंचायत की भूमिका भी संदिग्ध .

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शाहजहांपुर ,कलान में लगभग 16 लाख के घोटाले में एडीओ पंचायत की  भूमिका भी संदिग्ध 


पर्दे के पीछे से घोटाले में हो सकती है सहायक विकास अधिकारी पंचायत की संलिप्तता


घोटाले से जुड़े हैं कई यक्ष प्रश्न जिनका नहीं है किसी के पास कोई जवाब


ग्राम पंचायत सचिव ने 19 अगस्त को ही डीपीआरओ से की थी लिखित शिकायत


फिर भी डीपीआरओ ने इतने बड़े घोटाले को दबाए बैठे रहे


कलान-शाहजहांपुर

ग्राम पंचायत रफियाबाद कलान में हुए लगभग 1600000 रुपए के घोटाले में एडीओ पंचायत कलान प्रेम सागर यादव की भूमिका भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है।यह भी हो सकता है कि प्रेम सागर यादव सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) ने स्वयं बदनाम होने के डर से पर्दे के पीछे से घोटाले बाजों का साथ दिया हो। घोटाले में एडीओ पंचायत प्रेम सागर यादव की संलिप्तता भी प्रतीत होती दिख रही है। इस बड़े घोटाले से जुड़े कई ऐसे यक्ष प्रश्न हैं। जिनका किसी भी अधिकारी कर्मचारी व जनप्रतिनिधि के पास कोई जवाब नहीं है। क्योंकि घोटाले से पूर्व तत्कालीन एडीओ पंचायत धनराज पटेल का स्थानांतरण प्रयागराज हो गया था और 5 अगस्त को उन्हें जनपद शाहजहांपुर से रिलीव भी कर दिया गया था। इसके बाद विकासखंड कलान मे सहायक विकास अधिकारी पंचायत की कुर्सी प्रेम सागर यादव वर्तमान एडीओ पंचायत को मिली। तो इस स्थिति में पहला सवाल यह है कि चार्ज संभालने के बाद प्रेम सागर यादव एडीओ पंचायत कलान ने तत्कालीन एडीओ पंचायत धनराज पटेल का डोंगल बंद क्यों नहीं किया ? दूसरा सवाल यह है कि प्रेम सागर यादव एडीओ पंचायत कलान ने अपना डोंगल एक्टिव क्यों नहीं कराया ? तीसरा सवाल यह है कि जब ग्राम पंचायत अधिकारी अरुण निगम 10 अगस्त को निलंबित किए जा चुके थे। तो वर्तमान एडीओ पंचायत प्रेम सागर ने निलंबित ग्राम पंचायत अधिकारी अरुण निगम का डोंगल निष्क्रिय क्यों नहीं कराया ? चौथा सवाल यह है कि जब ग्राम पंचायत रफियाबाद कलान के ग्राम पंचायत अधिकारी सचिव शशि बिंदपाल थे। तो सहायक विकास अधिकारी पंचायत प्रेम सागर यादव ने ग्राम पंचायत अरुण निगम का डोंगल रजिस्टर्ड क्यों किया ? घोटाले से जुड़े ऐसे तमाम सवाल है।जिनकी गहराई तक यदि जाया जाए तो उससे साफ प्रतीत होता है कि वर्तमान एडीओ पंचायत प्रेम सागर यादव की इस बड़े घोटाले में संलिप्तता है। वर्तमान एडीओ पंचायत ने पूरा खेल ऐसे शातिराना तरीके से खेला कि मैं बदनाम ना हो सकूं और साफ बच जाऊं तथा घोटाले की जांच मुझ तक ना पहुंचे।यदि जांच पहुंचेगी भी जांच अधिकारी  घोटाले के संबंध में बयान लेंगे। तो मैं यह कह कर पल्ला झाड़ लूंगा कि मेरा तो डोंगल घोटाले के समय शुरू ही नहीं था। एडीओ पंचायत प्रेम सागर यादव की लापरवाही इस बात से भी प्रतीत होती है कि जब ग्राम पंचायत अधिकारी अरुण निगम 10 अगस्त को निलंबित किए जा चुके थे। तो ग्राम पंचायत बम्हनी  चौकी, ग्राम पंचायत लक्ष्मनपुर, ग्राम पंचायत ढका ताल्लुके टड़ई एवं ग्राम पंचायत हेतमपुर से 11, 12,13 अगस्त में पैसा बगैर एडीओ पंचायत की मर्जी से कैसे निकला।यहां यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि शासकीय धन का वर्तमान एडीओ पंचायत प्रेम सागर यादव की सहमति से ही बंदरबांट किया गया।केवल ग्राम पंचायत रफियाबाद कलान में ही नहीं बल्कि अन्य ग्राम पंचायतों में भी एडीओ पंचायत की सहमति से शासकीय धन का आहरण किया गया। इस बड़े घोटाले की जांच कर रहे जांच अधिकारी उपनिदेशक पंचायत देवीपाटन मंडल आर एस चौधरी को चाहिए कि वह इन सभी बिंदुओं पर जांच करें और शासकीय धन का दुरुपयोग करने वाले दोषियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ अभियोग पंजीकृत करा कर गिरफ्तारी के साथ ही शासकीय धन की रिकवरी भी कराएं। जिससे दोबारा ऐसे घोटालों की पुनरावृति हो और पंचायती राज विभाग की बची खुची छवि धूमिल ना हो। वहीं विश्वस्त सूत्रों की मानें तो प्रेम सागर यादव एडीओ पंचायत दबंग किस्म के हैं। उनकी रिश्तेदारी पड़ोस के ही गांव गुंदौरा दाउदपुर तथा ग्राम पंचायत टड़ई मजरा दारानगर मे है। कुल मिलाकर यदि यह कहा जाए कि  जब से एडीओ पंचायत कलान की कुर्सी प्रेम सागर यादव ने संभाली है।तब से विकास खंड कलान में घोटालो की बाढ़ सी आ गई है। प्रेम सागर यादव द्वारा शासकीय धन का बंदबांट करा कर योगी सरकार की छवि धूमिल की जा रही है तो यह गलत नहीं होगा। के एक गांव में है वहीं ग्राम पंचायत अधिकारी अरुण निगम 10 अगस्त को निलंबित किए जा चुके थे क्योंकि घोटाले की शिकायत तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव शशिबिन्द पाल ने 19 अगस्त को ही जिला पंचायत राज अधिकारी पवन कुमार को लिखित रूप से अवगत करा दिया था।फिर भी जिला पंचायत राज अधिकारी पवन कुमार इतने बड़े घोटाले को दबाए क्यों बैठे रहे और इसकी जानकारी उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी एवं जिला अधिकारी को क्यों नहीं दी ? कहीं इस पूरे घोटाले की शुरुआत डीपीआरओ कार्यालय से ही तो नहीं । जांच अधिकारी को घोटाले के प्रत्येक बिंदु पर जांच करना आवश्यक हो जाता है। क्योंकि यह घोटाला बहुत ही  शातिराना अंदाज में किया गया है और इसमें बड़े अधिकारी की संलिप्तता के बगैर इतना बड़ा घोटाला करना असंभव था।

ज्ञात हो कि ग्राम पंचायत रफियाबाद कलान जो कि वर्तमान में नगर पंचायत कलान है की ग्राम निधि में 11एवं 12 अगस्त को ई स्वराज पोर्टल से डोंगल एक्टिव करके लगभग 1600000 रुपए का घोटाला किया गया था जिसकी जांच अब उपनिदेशक पंचायत ने की है। उन्होंने संबंधित कर्मचारियों के बयान भी लिए। यहां आपको ध्यान रहे कि जब रफियाबाद कलान की ग्राम निधि से डोंगल एक्टिव करके सीज खाते से 16 लाख की शासकीय धनराशि को फर्जी तरीके से निकालकर हड़प लिया गया। जब इसकी जानकारी तत्कालीन सचिव शशिबिन्द पाल  को मिली तो उन्होंने 19 अगस्त को ही जिला पंचायत राज अधिकारी शाहजहांपुर को लिखित रूप से अवगत करा दिया था।फिर पहला सवाल ये उठता है कि डीपीआरओ कार्यालय की घोटाले में संलिप्तता नहीं थी तो जिला पंचायत राज अधिकारी इस पूरे मामले को क्यों दबाए बैठे रहे और उन्होंने इसकी जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को क्यों नहीं दी। दूसरा सवाल यह है कि भारत परिषद द्वारा 25 अगस्त की शिकायत कोई जांच का आधार क्यों बनाया गया कहीं डीपीआरओ शाहजहांपुर द्वारा भारत परिषद से शिकायत कराने का राज तो नहीं।यहां भी घोटाले की संलिप्तता नजर आ रही है। कहीं  घोटाला यहीं से तो शुरू नहीं हुआ क्योंकि भारत परिषद की शिकायत ने सीधा सीधा एडीपीएम एवं कलान के कंप्यूटर ऑपरेटर स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण केसरी पर घोटाले का आरोप लगाया गया सवाल ये उठता है कि भारत परिषद को बगैर किसी जांच के यह कैसे पता हुआ कि यदि डीपीएम ने ग्राम निधि से लगभग 16 लाख रुपया निकालकर बंदरबांट कर लिया है। इस पूरे मामले में षड्यंत्र एवं कूट रचना की बदबू आती प्रतीत हो रही है।मामले की अंदर तक गहराई में जाने पर प्रतीत होता है कि यह शिकायत इसलिए करवाई गई ।कि इस घोटाले में बड़े अधिकारी न फंसे और छोटे कर्मचारियों पर जांच अधिकारी का मजबूत फंदा पढ़ सके। कुल मिलाकर जिला अधिकारी एवं जांच कर रहे उपनिदेशक पंचायत को चाहिए कि घोटाले के प्रत्येक पहलू पर बारीकी से जांच करें तो दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो सकता है। विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया इस पूरे घोटाला में करीब 10 अधिकारी कर्मचारी एवं अन्य लोग शामिल हैं।अब देखना यह है कि इस घोटाले में किसकी गर्दन नपती है? यदि इस पूरे प्रकरण पर बारीकी से ध्यान दिया जाए।तो यह है तय है कि किसी छोटी मछली (छोटे कर्मचारी का) ही शिकार किया जाएगा।

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