Breaking News

ब्रेकिंग न्यूज़

सभी राजनीतिक दलों को दिल से गाँधी का सम्मान करना चाहिये: जावैद अब्दुल्लाह.

post

सभी राजनीतिक दलों को दिल से गाँधी का सम्मान करना चाहिये: जावैद अब्दुल्लाह

...............


गाँधी जयंती व अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर वीएलपी की देश और दुनिया को ढेरों शुभकामनाएँ

.....................

 

विश्व लोकतंत्र पार्टी (वीएलपी) ने गाँधी जयंती व अन्तरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस की देश और दुनिया को ढेरों शुभकामनाएँ दीं। सीरगोवर्धनपुर, वाराणसी में अपने अस्थायी निवास स्थान पर, पार्टी अध्यक्ष व लेखक जावैद अब्दुल्लाह ने ज़ोर देते हुए कहा कि इस दुनिया में प्रोफ़ेट्स और उनके कुछ गिनती के अनुयायिओं को छोड़कर मानव इतिहास में गाँधी वह पहले और अकेले व्यक्ति हैं जिसने राजनीति को सिद्धान्तः नैतिकता से इस तरह जोड़ दिया जिसके बाद नैतिकता के बिना राजनीति वस्तुतः राजनीति नहीं हो सकती। मुझे या आपको गाँधी से मतभेद हो सकता है, जिस तरह किसी भी इन्सान को किसी भी इन्सान के किसी भी बात पर मतभेद हो सकता है। लेकिन जिस तरह आप किसी इन्सान के इन्सान होने पर मतभेद नहीं रख सकते, उसी प्रकार आप ‘नैतिकताविहीन राजनीति’ को ग़लत मानने पर भी मतभेद नहीं रख सकते। जब आप इस नतीजे पर पहुँचते हैं तो गाँधी साक्षात् आपके सामने खड़े होते हैं, अब यदि आप इस इन्सान को किनारे करते हैं या पीछे कर देते हैं, तो यह चालाकी आपके अन्दर और फिर बाहर एक नई राजनीति शुरू करता है, जो नैतिकताविहीन राजनीति से कहीं अधिक हीन-राजनीति की शुरुआत है। ऐसी हीन-राजनीति की शुरुआत होने के बाद राज्य का अस्तित्व जिस भी रूप में बना रहे; परन्तु राज्य के अस्तित्व को मज़बूती से थामने वाली व सामाजिक न्याय की स्थापना में प्रतिभाग ग्रहण करने वाली सभी संस्थाओं का सैद्धान्तिक अन्त होना शुरू हो जाता है। उसके बाद समाज परतंत्र तथा लोक के लोकतान्त्रिक अधिकार महज़ जीने पर विवश एक दासतापूर्ण व्यवहारयंत्र बन जाता है और अंततः जन-गण का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। हालाँकि ‘नैतिक राजा और अनैतिक राजनीति’ या ‘अनैतिक राजा और नैतिक राजनीति’ जैसे भ्रमित तथ्य भी कुछ लोग गढ़ लेते हैं। परन्तु भ्रमित तथ्य से राजनीति का सिद्धांत नहीं अस्तित्व पाता। राजनीति हो या कोई और नीति, स्पष्ट्ता सिद्धांत का आधार है। मैं समझता हूँ कि सभी राजनीतिक दलों को दिल से गाँधी का सम्मान करना चाहिये। क्योंकि इस एक अकेले व्यक्ति में, भारतवर्ष की सम्पूर्ण सभ्यता विद्यमान है, गाँधी वास्तव में भारत के महाभारत काल में फैली भीषण हिंसा के उपरांत अहिंसा की स्थापना में अभी तक के अन्तिम स्थापक कहे जा सकते हैं किन्तु इस धरती पर मानव की आज़ादी के लिए जिस तरह उन्होंने अहिंसा का प्रयोग किया वह अहिंसा के इस स्वरुप के पहले संस्थापक बन चुके हैं जो स्वयं में अपनी मिसाल आप है। वहीं गाँधी के विचारों में आज की दुनिया की शान्ति नीहित है और मैं यह मानता हूँ कि पॉलिटिक्स इज़ डेथ विदाउट पीस। एंड पीस हैज़ नो फ्यूचर विदाउट वर्ल्ड पीस। अन्त में, मैंने यहाँ गाँधी के साथ महात्मा शब्द नहीं जोड़ा है। सम्भव है मुझे या आपको इस शब्द पर भी मतभेद हो। जिस तरह मतभेद और असहमति  का अधिकार निष्पक्षता समझा जाता है। वही निष्पक्षता सहमती का दायित्व निभाने में भी पूरी होनी चाहिए। यही नागरिक बोध है और यही बात गाँधी भी कहते हैं।

Latest Comments

Leave a Comment

Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner