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हरदोई, आरोग्य चेतना समिति ने किया कवि सम्मेलन का आयोजन.

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हरदोई, आरोग्य चेतना समिति ने किया कवि सम्मेलन का आयोजन


लोकतंत्र सेनानी, कवि, साहित्यकार, समाजसेवी, योगाचार्य ओम प्रकाश भदौरिया की प्रथम पुण्यतिथि पर बही काव्यरस की धारा


हरदोई।आरोग्य चेतना समिति के तत्वावधान में समाजसेवी, योगाचार्य ओम प्रकाश भदौरिया की प्रथम पुण्यतिथि पर विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।जिसकी अध्यक्षता प्रख्यात गीतकार व शायर साबिर जलालाबादी ने की। सम्मेलन में रचनाकारों ने कविताओं के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, देश प्रेम, भाईचारे का संदेश दिया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि आर्यावर्त बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक राजेश कुमार सक्सेना व विशिष्ट अतिथि डा. के. के. श्रीवास्तव ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन से किया। कवि सम्मेलन की विधिवत शुरूआत कवयित्री डा. गरिमा पांडेय व प्रीती तिवारी ने मां शारदे की वंदना से की। जलालाबाद से आए मशहूर गीतकार साबिर जलालाबादी ने मर्यादा पुरूषोत्तम राम और राम मंदिर पर अपनी कविता सुनाई। एक अन्य अपनी प्रसिद्ध गजल का शेर कुछ यूं पेश किया-

राज की बातें लिखीं और खत खुला रहने दिया।

जाने क्यों रुसवाइयों का सिलसिला रहने दिया।।

वरिष्ठ कवि गीत ऋषि महेंद्र पाल सिंह ने अपने गीतों से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। उन्होंने एक गीत को कुछ यूं परिभाषित किया-

कोई गीत नहीं गाता है, गीत अधर का क्या नाता है।

जिसका जितना दर्द बड़ा है, वह उतना अच्छा गाता है।। 

सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डा. संतोष पांडेय ने सुनाया-

जननी का आंचल जो फाड़ने की बात करे।

ऐसा शीश धड़ से उतार लेना चाहिए।।

शाहजहांुपर से आए शायर राशिद हुसैन राही जुगनू ने गजल के माध्यम से कहा-

जब मेरे नाम, मेरे जिक्र से नफरत है तुम्हें।

मेरी तस्वीर को फिर घर में सजाते क्यों हो।

कवयित्री प्रीती पवन तिवारी ने कई गीत व गजलें सुनाईं-

जो कुछ भी हो मेरी चाहत भले ही आम हो जाए।

मैं तुझको देख लंू तो दिल को कुछ आराम हो जाए।।

लखीमपुर खीरी से आए संजीव मिश्र व्योम ने बापू के बंदरों को प्रतीक बनाकर अपनी बात इस तरह से कही-

बुरा सुनो ना, बुरा कहो ना, बुरा न देखो प्यारे।

बापू आज तुम्हारे बंदर कहां खो गये सारे।।

श्रृंगार के कवि करूणेश दीक्षित सरल ने सुनाया-

तुम अधर खोल दो, मैं अधर खोल दंू।

तुम जो उड़ने चलो मैं भी पर खोल दूं।

कवि अरूण प्रताप सिंह भदौरिया ने झूठ और नफरत की राजनीति करने वालों पर तंज किया-

नफरत के बीज कहां से लाते हो।

इतना जहर कहां से पाते हो।

झूठ की गठरी लेकर चल देते हो।

इतना बोझा कैसे ढो पाते हो।

कार्यक्रम में इनके अलावा कवयित्री गरिमा पांडेय लेखनी, लखनऊ के अभिनव दीक्षित, हरदोई के व्यंग्यकार सतीश शुक्ल, लखीमपुर के शशीकांत तिवारी शशि, डा. राजेश हजेला, महेशपाल सिंह उपकारी, आनंद भदौरिया आदि ने भी काव्य पाठ किया। संचालन डा. राजेश हजेला ने किया। संयोजक आनंद भदौरिया व अरूण प्रताप सिंह भदौरिया ने सभी कवियों को अंग वस्त्र, स्मृति चिन्ह तथा प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में व्यापारी अनुराग अग्रवाल ने भी कवियों को उपहार भेंट किए। इस अवसर पर डा. चंद्रदेव यादव, डा. यशपाल चौहान,अनिल भदौरिया, रवि प्रताप, सत्येंद्र सिंह,राम धीरज, अश्वनी आर्य, सोहनलाल तिवारी, पुनीत यादव, राकेश कुमार,  सुजीत प्रधान, राजेश बाजपेयी, तरुण सिंह, अरुण सिंह,सैयद अमानुल हक, हिमांशु रॉय, विकास गुप्ता, आदित्य गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रोता  उपस्थित रहे।

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