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सीतापुर,क्या आपके नमक में आयोडीन है, नहीं तो खाने में करें शामिल .

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सीतापुर,क्या आपके नमक में आयोडीन है, नहीं तो खाने में करें शामिल 

- विश्व आयोडीन अल्पता विकार निवारण दिवस (21 अक्टूबर) पर विशेष

सीतापुर, 20 अक्टूबर। क्या आपके नमक में आयोडीन है...? यह वाक्य भले ही किसी विज्ञापन फिल्म का हो, लेकिन आज जरूरत है कि इसे हम सब अपने जीवन का मूलमंत्र बन लें। शरीर में आयोडीन की कमी को दूर करने के लिए हमें अपने दैनिक खानपान में आयोडीन का प्रयोग करना होगा। ऐसा करके हम न सिर्फ खुद को बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी कई बीमारियों से बचा कर स्वस्थ बना सकते हैं। 

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि आयोडीन एक महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्व है जो थायराइड हार्मोन के उत्पादन और गर्भाशय विकास के लिए आवश्यक है। आयोडीन की कमी वाली महिलाओं में थायरॉयड कार्य प्रणाली बाधित होती है, जिसका असर उनके प्रजनन स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आयोडीन की कमी गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क के विकास को अवरूद्ध कर देती है। आयोडीन की कमी से हाइपोथायरायडिज्म सबसे आम समस्याओं में से एक है। आयोडीन की कमी से बच्चों का मानसिक विकास कमजोर होता है, उर्जा में कमी आती है, जल्द थकान आती है। आयोडीन की कमी से गूंगा-बहरा, घेंघा रोग होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। 

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किस उम्र में कितनी लें आयोडीन --- 

आयोडीन की कमी से बच्चों में कई तरह की बीमारियों के होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। इन बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी है कि 11 माह तक के बच्चे को प्रतिदिन 50 माइक्रो ग्राम, पांच साल तक की उम्र के बच्चे को प्रतिदन 90 माइक्रो ग्राम, 6-12 साल तक के बच्चे के लिए 120 माइक्रो ग्राम और 12 साल से अधिक की आयु के लिए 150 माइक्रो ग्राम आयोडीन का सेवन करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 220 माइक्रोग्राम और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को प्रतिदिन 290 माइक्रोग्राम  आयोडीन का सेवन करना चाहिए। आयोडीन से शरीर स्वस्थ और दिमाग चुस्त बनता है, कार्यक्षमता में बढ़ोतरी होती है। 

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नमक के आयोडीनिकीकरण की योजना --- 

केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1954 में प्रोफेसर वी. रामालिंगास्वामी द्वारा अनुसंधान कराया जिससे पता चला कि घेघा रोग भारत में सभी राज्यों में व्याप्त है। जिसके बाद सरकार ने वर्ष 1962 में राष्ट्रीय घेघा नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया। वर्ष 1988 में खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम में संशोधन करके उसमें इस नियम को शामिल किया गया कि उत्पादन स्तर पर नमक में आयोडीन की मात्रा 30 पी.पी.एम. व फुटकर बिक्री के 15 पी.पी.एम. से कम नहीं होनी चाहिए। वर्ष 1992 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय घेघा नियन्त्रण कार्यक्रम का नाम बदलकर राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियन्त्रण कार्यक्रम रख दिया। 

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आयोडीन के प्रमुख स्रोत ---

आयोडीन का सबसे सामान्य स्रोत नमक है। इसके अलावा शकरकंद, प्याज, पालक, केला, दूध, दही पनीर, दालों, अनाज, मांस, अंडा, समुद्री मछली आदि खाद्य पदार्थों में आयोडीन होता है। इनका सेवन शरीर में आयोडीन की कमी को दूर करता है।

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