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सीतापुर,इस बार पटाखे से दूरी, सेहतमंद रहने के लिए जरूरी .

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सीतापुर,इस बार पटाखे से दूरी, सेहतमंद रहने के लिए जरूरी 

- वायु प्रदूषण व नमी के चलते जहरीला धुआं इर्द-गिर्द रहकर पैदा कर सकता है दिक्कत 

- सांसों के साथ ही फेफड़ों को प्रभावित कर कई बीमारियों को दे सकता है आमंत्रण  

सीतापुर, 01 नवंबर। कोरोना का संक्रमण कम जरूर हुआ है, लेकिन अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। एेसे में सरकार और स्वास्थ्य विभाग का हर संभव प्रयास है कि लोगों को त्योहारों की खुशियों के बीच भी सुरक्षित और सेहतमंद रखा जाए। दीपावली पर पटाखे जलाने की सदियों पुरानी परंपरा का निर्वाहन करने के लिए हमें अधिक सतर्कता और जागरूकता की जरूरत है। ऐसे में हम समुदाय को सेहतमंद बनाने में अपनी अहम् भूमिका निभा सकते हैं। 

इस समय वायु प्रदूषण और नमी की जद में प्रदेश के अधिकतर जिले हैं, ऐसे में पटाखे का जहरीला धुआं उड़कर ऊपर न जाकर नीचे हमारे इर्द-गिर्द ही रहकर सांसों के साथ ही फेफड़ों को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए सांस लेने में तकलीफ पैदा करने वाले कोरोना के साथ ही अन्य कई बीमारियों से बचने के लिए भी इस बार पटाखों से दूरी बनाने में ही सभी की भलाई है। सीएमओ डॉ. मधु गैरोला का कहना है कि दीपावली पर चंद सेकंड के धमाकों व तेज रोशनी के लिए की जाने वाली आतिशबाजी से निकलने वाले धुएं में मौजूद कैडमियम फेफड़ों में आॅक्सीजन की मात्रा को कम करता है। जिससे श्वसन तंत्र प्रभावित होता है, ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को सांस लेने में परेशानी होती है। इसके अलावा इसमें मौजूद सल्फर, कॉपर, बेरियम, लेड और एल्युमिनियम आदि सीधे श्वसन तंत्र क्षतिग्रस्त करती हैं।

एसीएमओ डॉ. पीके सिंह का कहना है कि पटाखों से निकलने वाला धुआं वातावरण में नमी के चलते बहुत ऊपर नहीं जा पाता है, जिससे हमारे इर्द-गिर्द रहकर सांस लेने में परेशानी, खांसी आदि की समस्या पैदा करता है। दमे के रोगियों की शिकायत भी बढ़ जाती है। धुंए के कणों के सांस मार्ग और फेफड़ों में पहुंच जाने पर ब्रानकाइटिस और सीओपीडी की समस्या बढ़ सकती है। एसीएमओ डॉ. सुरेंद्र शाही का कहना है कि यह धुआं सबसे अधिक त्वचा को प्रभावित करता है, जिससे एलर्जी, खुजली, दाने आदि निकल सकते हैं। पटाखों से निकलने वाली तेज रोशनी आंखों को भी नुकसान पहुंचाती है। इससे आंखों में खुजली व दर्द हो सकता है , आंखें लाल हो सकती हैं और आंसू निकल सकते हैं। चिंगारी आंखों में जाने से आंखों की रोशनी भी जा सकती है। पटाखों का तेज धमाका कानों पर भी असर डालता है। इससे कम सुनाई पड़ना या बहरापन की भी दिक्कत पैदा हो सकती है।

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