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गोरखपुर,मातृ-शिशु पोषण बनेगा पाठ्यक्रम और क्लिनिकल प्रैक्टिस का हिस्सा.

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गोरखपुर,मातृ-शिशु पोषण बनेगा पाठ्यक्रम और क्लिनिकल प्रैक्टिस का हिस्सा


अलाइव एंड थ्राइव संस्था के सहयोग से प्रशिक्षित किये गये एम्स के फैकल्टी


चार चिकित्सा संस्थानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी देने के लिए किया गया तैयार


गोरखपुर, 25 जनवरी 2022


मातृ-शिशु  पोषण को प्रदेश के उत्कृष्ट चिकित्सा संस्थानों के अंडर ग्रेजुएट छात्रों के पाठ्यक्रम व क्लिनिकल प्रैक्टिस का हिस्सा बनाने की तैयारी है । इस संबंध में अलाइव एंड थ्राइव संस्था के सहयोग से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के अलग-अलग विभागों के 20 फैकल्टी प्रशिक्षित किये गये हैं । इन्हें चार चिकित्सा संस्थानों को प्रशिक्षण और तकनीकी जानकारी देने के लिए तैयार किया गया है ।


नई दिल्ली की यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज के डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन से जुड़ीं गाइनकलॉजिस्ट डॉ अनिता गुप्ता और इसी संस्था के डॉ. अमिर मारूफ खान ने फैकल्टीज को प्रशिक्षित किया । प्रशिक्षण में बताया गया कि गर्भावस्था से लेकर 1000 का शुरूआती दिन मातृ-शिशु के जीवन और पोषण स्तर के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस दौरान मां को पौष्टिक आहार दिया जाना चाहिए और मां को आहार में बारम्बारता बढ़ाना चाहिए । बच्चे के जन्म के तुरंत बाद मां का गाढ़ा पीला दूध दिया जाना चाहिए। । छह महीने तक सिर्फ और सिर्फ मां का दूध दिया जाना चाहिए और छह महीने बाद दूध के साथ अर्धठोस पूरक आहार दिया जाना चाहिए। प्रशिक्षण में बताया गया कि इन मुख्य संदेशों और तकनीकी को किस प्रकार पाठ्यक्रम और क्लिनिकल प्रैक्टिस का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ।


प्रशिक्षण से मिली जानकारी को एसएन मेडिकल कालेज आगरा, झांसी मेडिकल कालेज, अंबेडरकर नगर मेडिकल कालेज और एम्स रायबरेली के फैकल्टीज तक पहुंचाया जाएगा । कार्यशाला का शुभारंभ एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने गुरूवार को किया था और सभी फैकल्टी से अपेक्षा कि पोषण से संबंधित जानकारी का अपेक्षित सदुपयोग हो । कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग के हेड डॉ. हरिशंकर जोशी और एलाइव एंड थ्राइव संस्था के वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक राजेंद्र जी ने भी प्रशिक्षण सत्रों को संबोधित किया । संस्था के वरिष्ठ कार्यक्रम प्रबंधक ने बताया कि बिहार के कई चिकित्सा संस्थानों में मातृ-शिशु पोषण को पाठ्यक्रम एवं क्लिनिकल प्रैक्टिस का हिस्सा बनाया गया है । कार्यक्रम में विभिन्न विभागों से डॉ. प्रदीप खरैया, डॉ. अनिल कोपकर, डॉ. प्रीति प्रियदर्शिनी, डॉ. प्रीति बाला और डॉ. महिमा मित्तल ने प्रमुख तौर पर प्रतिभाग किया ।


*गर्भावस्था से जुड़ा है शिशु के पोषण का राज*


गर्भावस्था में सही पोषण न मिलने से मां के पेट में पल रहा बच्चो कुपोषित हो सकता है ।

संपूर्ण भोजन, नियमित वजन निगरानी और प्रसव पूर्व जांच, मां और शिशु के वृद्धि व विकास को सुनिश्चित करता है ।

गर्भावस्था के दौरान मां का वजन लगभग 10 से 12 किलो बढ़ना चाहिए।

गर्भवती को दिन में कम से कम पांच बार खाना चाहिए जिसमें तीन बार मुख्य भोजन और दो बार पौष्टिक नाश्ता होना चाहिए।

गहरे रंग की हरी पत्तेदार सब्जी, विटामिन सी युक्त खाद्य पदार्थ, साबुत दालें और फलियां, अनाज जैसे बाजरा, ज्वार, रागी, दूध या दूध से बनी चीजें मां के आहार का हिस्सा होनी चाहिएं।

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