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सिधौली,सुशील सिद्धार्थ की पुण्यतिथि पर तहसील के सामने स्मृतिसभा आयोजित.

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सिधौली,सुशील सिद्धार्थ की पुण्यतिथि पर तहसील के सामने स्मृतिसभा आयोजित


सिधौली(सीतापुर) सुशील सिद्धार्थ अवधी का गौरव थे। उन्हें अपने अवधीभाषी होने पर गर्व था। कई बार वे अंग्रेजीदाँ विद्वानों के बीच बोलते हुए भी अवधी का प्रयोग कर देते थे। अवधी की सारगर्भित कहावतों और उक्तियों का प्रयोग उनके व्यक्तित्व का अंग था। यह बात स्व0 सुशील सिद्धार्थ की पुण्यतिथि पर तहसील के सामने आयोजित स्मृतिसभा की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध साहित्यकार भगवती प्रसाद अग्निहोत्री ने कही।

उन्होंने कहा कि सुशील सिद्धार्थ के साहित्य की सार्थकता इस बात में है कि उन्होंने अवधी की प्राचीन परम्परा को आगे बढ़ाते हुए उसे आधुनिकता से जोड़ा। पत्रकार एवं कवि अनुराग आग्नेय ने स्व0 सुशील सिद्धार्थ से जुडे़ कई संस्मरण सुनाते हुए कहा कि अपने आस-पास के लोगों की समय-समय पर मदद करना भी उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष था। उनकी कविताएँ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि आम जनता की जल-जमीन और जंगल की लड़ाई का हथियार थीं।

अधिवक्ता एवं लेखक अनूप कुमार ने स्व0 सिद्धार्थ के व्यक्तित्व पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे मात्र कवि ही नहीं थे बल्कि एक भाषाविद, व्यंग्यकार, सम्पादक, शोधकर्ता और सबसे बढ़कर एक सजग संस्कृतिकर्मी थे। उनका असमय प्रयाण अवधी जगत की एक ऐसी क्षति है जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता। अवधी व हिन्दी के कवि देवेन्द्र कश्यप ‘निडर’ ने सुशील जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे अवधी के आधुनिक साहित्यकारों में अग्रगण्य थे। उन्होंने  कविता में पढ़ीस और वंशीधर शुक्ल की जनपक्षधर परम्परा को आगे बढ़ाया।

गोष्ठी के मुख्य अतिथि वयोवृद्ध लोकतन्त्र सेनानी चन्दूलाल दीक्षित ने अवधी कविता की परम्परा पर प्रकाश डालते हुए  कहा कि पहले शादी-विवाह के मौके पर शिष्टाचार होता था, जिसमें लोग अवधी की कविताएँ सुनाते थे। लोगों को दर्जनों कविताएँ याद होती थी परन्तु अब अवधी कविता भी अपनी जनता से कट गई है और चुटकुलेबाजी तक सीमित हो गई है। इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता हरिनारायण सिंह ‘भोला सिंह’, पंकज मिश्रा, ज़ियाउर्रहमान सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।

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