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अटरिया सिधौली,ग्राम समाज की जमीन से हटेंगे कब्जे, सरकारी भूखंड पर कब्जे का होगा खुलासा की जा सक्ति है कार्यवाही.

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अटरिया सिधौली,ग्राम समाज की जमीन से हटेंगे कब्जे, सरकारी भूखंड पर कब्जे का होगा खुलासा की जा सक्ति है कार्यवाही

रिपोर्ट, ज्ञानेन्द्र मिश्रा

अटरिया सिधौली सीतापुर,ग्रामीण क्षेत्रों में घर के अगल-बगल की ग्राम समाज की जमीन का अपनी पैतृक संपत्ति की तरह उपयोग कर रहे गांव वालों को कब्जा छोड़ना होगा। तालाब, खलिहान व सार्वजनिक उपयोग की अन्य जमीन पर भी कब्जेदारी का स्थायी मोह छोड़ना होगा।

केंद्र के सहयोग से शुरू हो रही स्वामित्व योजना में ग्रामीण आबादी के अंतर्गत सरकारी व निजी परिसंपत्तियों को अलग-अलग चिह्नांकित कर डिजिटल अभिलेख तैयार किया गया है। ग्रामीणों को इसका प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इससे वे अपने मकान व आबादी के भूखंड पर भी बैंक ऋण ले सकेंगे।

सिधौली विकाश खण्ड के थाना अटरिया छेत्र की रनुआपारा सहित अन्य ग्राम पंचायतो मे ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम लोग घर के बगल के ग्राम समाज, खलिहान, सड़क, तालाब, नाले व सार्वजनिक उपयोग की अन्य जमीन को अपनी निजी संपत्ति की तरह उपयोग कर रहे हैं। दशकों पुराने तालाबों को पाटकर कब्जे कर लिए। कई जगह स्थायी या अस्थायी निर्माण कर लिए गए हैं। कागज में अब भी सार्वजनिक भूखंड व तालाब उपलब्ध हैं, लेकिन जमीन पर उनका अता-पता नहीं है।

इस तरह के तमाम भूमि विवाद भी चल रहे हैं। स्वामित्व योजना से ग्राम समाज के भीतर सरकारी भूखंड पर ऐसे कब्जों की पोल खुलने जा रही है। सभी जिलों को निर्देश भेज दिए गए हैं।

ग्राम पंचायत को लाभ संपत्ति विवाद से मुक्ति

- अपने क्षेत्राधिकार में संपत्ति धारण करने वालों की नवीनतम जानकारी उपलब्ध होगी। इससे विकास योजना बनाने में मदद मिलेगी।

- निजी व ग्राम समाज के बीच भूमि विवाद में कमी आएगी। प्रत्येक संपत्ति की सीमा व क्षेत्रफल सुनिश्चित होने से निजी संपत्ति के विवाद भी कम होंगे।


...और ग्रामीणों को ये लाभ


- प्रत्येक संपत्ति धारक को संपत्ति का प्रमाणपत्र व भूमि स्वामित्व प्राप्त होगा।


- सार्वजनिक उपयोग की संपत्ति का स्थानीय लोग समान तरीके से उपयोग कर सकेंगे


उत्तर प्रदेश में सरकारी ग्राम पंचायत और निजी जमीनों पर कब्जा करने वालों की अब खैर नहीं। योगी सरकार ने पहली बार राजस्व और पुलिस विभाग के साझा सहयोग से जो अभियान शुरू किया है उसे काफी सफलता मिल रही है। जमीन कब्जा मुक्त कराने के श्रावस्ती जिले के मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया गया है। सरकार की योजना मई तक हर तरह की जमीन को कब्जा मुक्त कराने की है।


जमीन विवाद को लेकर खासे विवादित राज्य उत्तर प्रदेश में विशेष भूमि विवाद निस्तारण अभियान माह चलाया जा रहा है। बीजेपी ने विधानसभा चुनाव में जमीन कब्जा मुक्त कराने का वादा किया था, सरकार बनने के बाद एंटी भू-माफिया बिग्रेड बनी। लेकिन गांव के लिए 1 जनवरी से अब विशेष अभियान चलाया जा रहा है।


सरकार ने हर गांव के लिए बाकायदा एक कैलेंडर जारी किया है, जिसमें तय है कि राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीमें कब किस गांव जाएंगी। नए अभियान के तहत उन जमीनों से भी कब्जा हट गया है, जिस पर 50-50 वर्षों से दबंग जमे हुए थे।


दरअसल जमीन से जुड़ा मामला राजस्व का होता है। पुलिस का काम कानून व्यवस्था का है। लेकिन व्यक्ति पहले पुलिस के पास पहुंचता है, फिर कचेहरी। इसके साथ कभी लेखपाल नहीं मिलता था तो तहसीलदार साहब मौजूद नहीं होते थे। राजस्व की टीम होती थी तो पुलिस टीम उपलब्ध हो पाती थी, लेकिन अब सरकार ने हर गांव के लिए दो टीमें बना दी हैं, एक राजस्व परिषद की दूसरी पुलिस।


राजस्व निरीक्षक की माने तो जब इतनी बड़ी टीम एक साथ पहुंचती है तो कब्जाने वाला भी टामलमोट नहीं कर पाता। विशेष भूमि विवाद निस्तारण अभियान के तहत पहले उन मामलों पर कार्रवाई होती है, जो काफी पुराने, जिनमें बार-बार शिकायत होती है। इसके साथ ही कोर्ट से जुडे मामलों में सर्वसम्मति होने पर सुलझाने की कोशिश होती है। फिलहाल मार्च तक का हर गांव का कैलेंडर तैयार है।

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