Breaking News

ब्रेकिंग न्यूज़

कानपुर,विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस (28 मई) पर विशेष.

post

कानपुर,विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस (28 मई) पर विशेष


थीम एक ऐसी दुनिया बनाना जहां 2030 तक कोई महिला या लड़की मासिक धर्म के कारण पीछे न रहे


माहवारी पर खुल कर बात करना है ज़रूरी  सीएमओ


कानपुर, 27 मई 2022 - 


महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान कई तरह की चुनौतियों व समस्याओं का सामना करना पड़ता है। माहवारी के दौरान स्वच्छता और साफ-सफाई के प्रति सजग और जागरूकता लाने के लिए हर वर्ष 28 मई को विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस मनाया जाता है जिससे उन्हें झिझक छोड़ने और इस बारे में खुलकर बात रखने का मौका मिल सके | इस वर्ष इसकी थीम एक ऐसी दुनिया बनाना जहां 2030 तक कोई महिला या लड़की मासिक धर्म के कारण पीछे न रहे है । यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ नैपाल सिंह ने दी ।  


सीएमओ का कहना है कि वक़्त की ज़रूरत है कि माहवारी पर खुलकर बात होनी चाहिए। सिर्फ पुरुषों के बीच ही नहीं, बल्कि महिलाओं के बीच भी इस पर बात करना शर्म की बात समझी जाती है। इस पर जागरूकता की ज़रूरत है। कोई भी समस्या होने पर बिना हिचक के डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें और सही सलाह और इलाज लें |


जिला महिला चिकित्सालय की वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ रूचि जैन  जानकारी देते हुए बताती हैं – माहवारी के समय स्वच्छता रखना बेहद अहम है, ज़रूरी है कि सफाई के साथ ही 2-3 घंटे के अन्तराल पर कपड़ा या पैड बदलना बहुत ही ज़रूरी है| अक्सर कामकाजी महिलाएं भी इस चीज को नज़रंदाज़ कर देती हैं| लम्बे समय तक एक ही पैड को लगाने से पसीना और रक्तस्त्राव कि वजह से बदबू के साथ ही यौन संचारी और प्रजनन मार्ग संक्रमण (आरटीआई / एसटीआई ) फैलने कि संभावना रहती है| साथ ही उचित साफ सफाई नहीं रखने पर सर्वाइकल कैंसर होने की भी संभवाना होती है| 

  

अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) डॉ एसके सिंह ने बताया कि मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई और स्वच्छता को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहें, जिससे उन्हें किसी भी तरह के घातक संक्रमण का शिकार न होना पड़े। पिछले वर्ष की भातिं इस बार भी महिलाओं और किशोरियों को मासिक धर्म के प्रति फैली भ्रांतियों के बारे में जागरूक किया जाएगा। डॉ सिंह का कहना है कि मासिक धर्म के बारे में बताने वाली सबसे अच्छी जगह स्कूल हैं। यहां इस विषय को यौन शिक्षा और स्वच्छता से जोड़कर चर्चा की जा सकती है। 


माहवारी का प्रबंधन व निपटान 


माहवारी में सूती कपड़े के पैड का उपयोग सबसे अच्छा रहता है। अगर कपड़े का पैड नहीं है तो सूती मुलायम कपड़े को पैड की तरह मोड़कर उपयोग करना चाहिए। हर दो घंटे में पैड बदलना चाहिए। पैड बदलने के समय जननांग को पानी से धोकर सुखा ले। उपयोग किये हुए पैड को साबुन व ठंडे पानी से धोना चाहिए व् तेज धूप में सुखाना चाहिए। ऐसा करने से कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। सूख जाने के बाद पैड को एक साफ़ धुली कपड़े की थैली में मोड़कर रखें। माहवारी में उपयोग किये गए पैड या कपड़े को खुले में नहीं फेंकना चाहिये क्योंकि ऐसा करने से उठाने वाले व्यक्ति में संक्रमण का खतरा हो सकता है। हमेशा पैड को पेपर या पुराने अखबार में लपेटकर फेंकना चाहिये या पैड को जमीन में गड्ढा खोदकर गाड़ भी सकते है।


क्या होती है माहवारी? 


माहवारी एक लड़की के जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है, जिसमें योनि से रक्तस्राव होता है। माहवारी एक लड़की के शरीर को माँ बनने के लिए तैयार करती है। एक लड़की की पहली माहवारी 9-13 वर्ष के बीच कभी भी हो सकती है। हर परिपक्व लड़की की 28-31 दिनों के बीच में एक बार माहवारी होती है। माहवारी का खून गन्दा या अपवित्र नहीं होता है। यह खून गर्भ ठहरने के समय बच्चे को पोषण प्रदान करता है। कुछ लड़कियों को माहवारी के समय पेट के निचले हिस्से में दर्द, मितली और थकान हो सकती है। यह घबराने की बात नहीं है।


इन बातों का रखें ख्याल - 

- घर में रखे पुराने गंदे कपड़े का प्रयोग न करें। इससे संक्रमण का खतरा रहता है।

- छः घंटे के अंतराल पर सैनिटरी नैपकिन बदलना चाहिए।

- समय-समय पर गुप्त अंगों की सफाई करती रहें।

- पीरियड्स के समय कई बार शरीर में दर्द होता है। इसलिए गर्म पानी से नहाएं।

- अपने बिस्तर की सफाई का ध्यान रखना चाहिए। समय-समय पर बेडशीट (बिस्तर कि चादर) बदलती रहें।

- अगर यात्रा पर हैं और शौचालय जाना हो तो सफाई वाली जगह पर जाएं।

- खान-पान का रखें ख्याल। सुपाच्य आहार का सेवन करें।

Latest Comments

Leave a Comment

Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner