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श्रावस्ती,साथिया केंद्रों पर मिल रही माहवारी स्वच्छता प्रबंधन की जानकारी.

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श्रावस्ती,साथिया केंद्रों पर मिल रही माहवारी स्वच्छता प्रबंधन की जानकारी


- बीते साल 1,117 किशोरियों ने माहवारी स्वच्छता प्रबंधन तथा यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी ली जानकारी 


- माहवारी स्वच्छता प्रबंधन दिवस (28 मई) पर विशेष 



श्रावस्ती। माहवारी के दिनों में मन्दिर न जाना, पूजा न करना, अचार न छूना, खाना न बनाना..., यह एक दकियानूसी कुप्रथा मात्र है। बदलते दौर में इस कुप्रथा पर विराम लग रहा है। माहवारी (मासिक धर्म) का आना शर्म या संकोच का नहीं बल्कि एक महिला के लिए स्वस्थ होने की निशानी है।” यह कहना है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम की जिला समंवयक बबीता बाजपेयी का। वह कहती हैं कि "उचित पोषण के लिए किशोरियों व महिलाओं के लिए तिरंगा भोजन अहम है। वहीं उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए माहवारी स्वच्छता प्रबंधन की जानकारी का होना भी बेहद आवश्यक है।" 

इसके लिए ब्लॉक स्तरीय सीएचसी पर साथिया केंद्रों (किशोर स्वास्थ्य एवं परामर्श क्लीनिक) की स्थापना की गई है। इन केंद्रों पर प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा किशोर-किशोरियों की शंकाओं और जिज्ञासाओं का समाधान तो किया ही जा रहा है, साथ ही उन्हें माहवारी स्वच्छता, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य, चोट और हिंसा को रोकने और मादक पदार्थों के दुष्परिणामों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। इन केंद्रों पर बीते साल 1,117 किशोरियों ने माहवारी स्वच्छता प्रबंधन तथा यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया है। 

राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के नोडल अफसर और उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संत कुमार का कहना है कि किशोरावस्था में शारीरिक व मानसिक बदलाव तेजी से होते हैं। इस उम्र में किशोर और किशोरियां यौन, मानसिक तथा व्यावहारिक रूप से परिपक्व होने लगते हैं। ऐसे में उनके सामने ऐसे तमाम अनसुलझे सवाल, शंकाएं और जिज्ञासाएं होती हैं। प्रदेश सरकार का भी किशोर-किशोरियों को इन सारे मुद्दों पर सटीक और पूरी तरह से सही-सही जानकारी मुहैया कराने पर पूरा जोर है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला अस्पताल से लेकर सीएचसी स्तर पर राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरकेएसके) के तहत साथिया केंद्र की स्थापना की गई है। इन केंद्रों पर प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा किशोर-किशोरियों की शंकाओं और जिज्ञासाओं का समाधान तो किया ही जा रहा है, साथ ही उन्हें पोषण, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, चोट और हिंसा को रोकने और मादक पदार्थों के दुष्परिणामों के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिला संयुक्त चिकित्सालय सहित इकौना सीएचसी पर ही साथिया केंद्रों का संचालन हो रहा है। इन दोनों केंद्रों पर बीते एक साल में जिले के दो साथियों केंद्रों पर 6,621 किशोर-किशोरियों ने अपनी समस्याओं, शंकाओं और जिज्ञासाओं का समाधान पाया है। इसके अलावा साथिया केंद्र के काउंसलर द्वारा 17,774 किशोर-किशोरियाें की जिले के अलग-अलग स्थानों पर काउंसलिंग की गई है।

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