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श्रावस्ती,सिरसिया, मल्हीपुर और गिलौला सीएची को मिला काया कल्प अवार्ड .

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श्रावस्ती,सिरसिया, मल्हीपुर और गिलौला सीएची को मिला काया कल्प अवार्ड 

- तीनों सीएचसी को मिलेगा एक-एक लाख रुपए का का पुरस्कार 

श्रावस्ती। जिले की पांच सीएचसी में से तीन सीएचसी ने काया कल्प अवार्ड जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है। यह अवार्ड सीएचसी सिरसिया, मल्हीपुर और गिलौला को हासिल हुआ है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. एपी भार्गव ने बताया कि इन तीनों सीएचसी को इस साल क्वालिटी एश्योरेंस के तहत सांत्वावना पुरस्कार मिला है। सीएमओ ने बताया कि प्रदेश में कई सालों से क्वालिटी एश्योरेंस के अंतर्गत सीएचसी और पीएचसी को कायाकल्प पुरस्कार दिया जा रहा है। इन पुरस्कारों के लिए तीनों सीएचसी के समस्त चिकित्सा अधीक्षक समेत सभी स्वास्थ्य कर्मी बधाई के पात्र हैं। अन्य सीएचसी

व पीएचसी के चिकित्सा अधीक्षकों को भी इनसे प्रेरणा लेकर भविष्य में इस तरह के पुरस्कार प्राप्त करने के लिए प्रयास करने चाहिए। 

सीएमओ ने बताया कि कायाकल्प पुरस्कारों की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 मई 2015 को की थी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने इस साल जो सूची जारी की है। उसमें सिरसिया, मल्हीपुर और गिलौला सीएची के नाम सांत्वाना पुरस्कार के रूप में शामिल हुए हैं। इन पुरस्कारों के रूप में तीनों सीएचसी को एक-एक लाख रुपये की धनराधि प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुल 265 सीएचसी ऐसे हैं, जिन्होंने 70 फीसदी से अधिक अंक हासिल कर यह पुरस्कार प्राप्त किया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक ने संबंधित जिलों को पत्र भेजकर पुरस्कार की सूचना दी है। पत्र में प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार पुरस्कार राशि का 75 फीसदी हिस्सा चिकित्सा इकाई के गैप क्लोजर, सुदृढ़ीकरण, रख-रखाव व स्वच्छता व्यवस्था आदि पर खर्च किया जाना है, जबकि 25 फीसदी हिस्सा संबंधित इकाई के अधिकारियों व कर्मचारियों के उत्साहवर्धन के लिए खर्च किया जाना है।  

जिला परामर्शदाता क्वालिटी एश्योरेंस डॉ. राम समुझ चौधरी ने बताया कि सिरसिया सीएचसी ने 77.29 अंकों के साथ प्रदेश में 67वां, मल्हीपुर सीएचसी ने 74.14 अंकों के साथ प्रदेश में 129वां और गिलौला सीएचसी ने 73.243 अंकों के साथ प्रदेश में 140वां स्थान हासिल किया है। उन्होंने बताया कि इस श्रेणी में पुरस्कार पाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सात बिंदुओं रोगी संतुष्टि में वृद्धि करना, चिकित्सालय कर्मियों के कार्यशैली एवं दक्षता में सुधार करना, सफाई, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन, हाइजिन प्रमोशन, सेनिटाइजेशन, संक्रमण प्रबंधन आदि पर जांच टीम के द्वारा अंक दिए जाते हैं। इन्हीं अंकों के आधार पर पीएचसी की रैकिंग तैयार होती है।

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