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अटरिया, क्षेत्र में अंधाधुन अवैध पेड़ो का कटान जारी पुलिस व वन विभाग बना रहा अनजान.

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अटरिया, क्षेत्र में अंधाधुन अवैध पेड़ो का कटान जारी  पुलिस व वन विभाग बना रहा अनजान

रिपोर्ट, ज्ञानेन्द्र मिश्रा

अटरिया-सीतापुर! जनपद सीतापुर के थाना अटरिया क्षेत्र में अंधाधुन अवैध कटान जारी अवैध कटान के चलते फल पट्टी का अस्तित्व खतरे में क्षेत्र के वन माफिया व वन विभाग अधिकारी एवं पुलिस की सांठगांठ से अवैध कटान कर पर्यावरण का अस्तित्व खत्म करने पर जुटी हुई है यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जिस दिन सिधौली अटरिया फल पट्टी क्षेत्र रेगिस्तान बन जाए पर्यावरण दिवस 5 जून को शासन प्रशासन द्वारा मनाया गया था जिसमें लाखों वृक्षों का वृक्षारोपण ग्राम पंचायतों में कराने का काम किया पर्यावरण दिवस के महज कुछ ही दिन बीतने के बाद अंधाधुंध पेड़ों का कटान जारी हो गया आए दिन अवैध पेड़ों का कटान मुख्य रूप से किया जा रहा है वन माफियाओं को किसी भी शासन-प्रशासन का कोई भी डर भय नहीं रहा वनवासियों की आंखो का पानी मर चुका है 5 जून पर्यावरण दिवस के बाद आज 20 जून के बीच लगभग सैकड़ों पेड़ों का कटान कर दिया गया जिसके बारे में क्षेत्र के वन अधिकारीयों से जानकारी की आती है तो ओ साफ डकार जाते हैं कि मुझे तो इसके बारे में कोई भी जानकारी नहीं है और मैं इस वक्त बाहर हूं यह कह कर के डाल दिया जाता है आखिर क्यों! इसके पीछे बहुत बड़ा राज छुपा हुआ है वन विभाग अधिकारी व पुलिस प्रशासन वन माफियाओं से कटान के पहले ही बंदरबांट कर लेते हैं जिससे बाद में वनवासियों को कोई भी समस्या भी नहीं आने देते हैं मौके पर पहुंचते ही नहीं हैं अगर पहुंच भी गए तो बोल दिया जाता है थाने आकर मिल लेना अभी बीते कुछ ही दिनों पहले ग्राम पंचायत ससेना , परेवाजाल के पास रानीपुरवा, जैपालपुर, बगयिया, व टिकौली के पास सपही, में शीशम के पेड़ों का कटान दिनदहाड़े कर दिया गया और सिकायत के बाद भी कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे । 


*पेङ कटान के मामले में जांच की उठी मांग*

यहां पर यह खास प्रश्नचिन्ह खड़ा हो रहा है कि एक तरफ पेन कटता है वहीं दूसरी तरफ मौके से गायब कर दिया जाता है मौके पर सिर्फ पेड़ की जड़ बताना ही मिलता है इलाके के ठेकेदार इतना शातिर हो गए हैं कि जब तक कोई कार्यवाही हो उससे पहले सब रफा-दफा कर दी देते हैं जिम्मेदारों से जब जानकारी ली जाती है तो उनके द्वारा साफ मना कर दिया जाता है कि मुझे तो इसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं परंतु अब जांच का विषय बना हुआ है कि आखिर बिना किसी आला अधिकारियों की जानकारी के बिना अवैध पेड़ों का कटान कैसे कर दिया जाता है वह भी थाने से लगभग 3 -2 किलोमीटर की अंतराल पर इससे पहले कई लोगों पर पुलिस द्वारा कार्यवाही भी की जा चुकी है अब तो वही हाल है कि किसी पर हम किसी पर सितम देखो यही कहावत बनी रहती है कि आगे कोई कार्यवाही भी होगी।


पेड़ लगाने से पहले वन विभाग के अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली लेकिन यह शपथ गुलाबी नोटों के आगे कुछ पल भी नाटक सकी नोटों की चमक क्षेत्र में लकड़ी की कटाई जोरों पर चला रही है प्रतिबंधित वृक्षों आम नीम शीशम का कटान धड़ल्ले से किया जा रहा है सब कुछ जानने के बाद भी जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं शिकायतकर्ता की पहचान तक गुप्त नहीं रखते हैं वन कर्मचारी किसी भी शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है लेकिन वन विभाग के अधिकारी कभी ऐसा नहीं करते अक्सर देखा गया है कि जब अवैध कटान की शिकायत शिकायतकर्ता द्वारा जब विभाग के अधिकारियों से की जाती है तो वन विभाग के अधिकारी ठेकेदार को इसकी सूचना देने के साथ उसका मोबाइल नंबर दे देते हैं थाना क्षेत्र इलाके में अवैध कटान वन विभाग व पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रही है पेड़ों के कटान मामले में जांच की उठी मांग।

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