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सीतापुर,स्वास्थ्य केंद्रों पर लगे कंडोम बॉक्स की ओर बढ़ा लोगों का रूझान.

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सीतापुर,स्वास्थ्य केंद्रों पर लगे कंडोम बॉक्स की ओर बढ़ा लोगों का रूझान

- जनसंख्या स्थिरीकरण को नि:शुल्क उपलब्ध करा रहा स्वास्थ्य विभाग

सीतापुर। करीब पांच साल पहले मेरी शादी हुई थी, मेरी डेढ़ साल की एक बेटी भी है। मैं अभी दूसरा बच्चा नहीं चाहता हूं। मुझे  मेडिकल स्टोर के संचालक और वहां पर मौजूद दूसरे ग्राहकों की भीड़ के चलते इसे खरीदने में आपको संकोच हो रहा था। लेकिन एक दिन अचानक मेरी नजर सीएचसी पर लगे कंडोम बॉक्स (कंडोम पेटिका) पर पड़ी, बस फिर क्या था, मेरी तो तमाम मुश्किलें हल हो गईं, अब मैं जब भी चाहता हूं इसी बॉक्स से कंडोम ले आता हूं और वह भी फ्री। मैंने अपने कई साथियों को भी इस बॉक्स के बारे में जानकारी दी है। यह कहना है मछरेहटा ब्लॉक के 29 वर्षीय सोनू गुप्ता का। 

अपने परिवार को सीमित रखने... दो बच्चों के बीच में अंतर रखने के लिए परिवार नियोजन का अस्थायी साधन कंडोम एक बेहतर विकल्प है। लेकिन कई बार झिझक के चलते लोगों को इसे खरीदने में मुश्किल होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर कंडोम पेटिका (कंडोम बाॅक्स) की व्यवस्था की है। यहां से 24 घंटे कभी भी निःशुल्क कंडोम प्राप्त किया जा सकता है। 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुजीत वर्मा ने बताया कि जिले के 528 स्वास्थ्य केंद्रों पर कंडोम बॉक्स लगाए गए हैं। जिनमें से जिला चिकित्सालय सहित सभी 19 सीएचसी, 60 पीएचसी और 448 स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर लकड़ी से बने बॉक्स में कंडोम के पैकेट भरकर ऐसी जगह लगाये गए हैं, जहां सभी की पहुंच भी हो और उनकी गोपनीयता भी बनी रहे। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध है और यहां से कभी भी निःशुल्क कंडोम प्राप्त किया जा सकता है। कंडोम बॉक्स खाली होने पर स्वास्थ्य कार्यकर्ता पुनः इसे भर देते हैं और यह चक्र चलता रहता है। 

परिवार नियोजन कार्यक्रम के प्रबंधक जावेद खान ने बताया कि गर्भावस्था को रोकने के साथ ही संक्रमण को रोकना और यौन व प्रजनन स्वच्छता में सुधार करना पुरुष की भी जिम्मेदारी है। इसके लिए परिवार नियोजन का एक मात्र अस्थायी साधन कंडोम अधिकतर लोगों के लिए उपयुक्त है और इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं है। इसकी उपलब्धता आमजन तक आसान हो, इसके लिए जिले के सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर कंडोम बाक्स की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने यह भी बताया कि जिले में वित्तीय वर्ष 2019-20 में जहां 6.41 लाख कंडोम की खपत थी वहीं 2021 -22 में बढ़कर 7.2 लाख से अधिक हो गई है। 

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ --- 

एसीएमओ (आरसीएच) डॉ. कमलेश चंद्रा ने बताया कि कंडोम परिवार नियोजन का अस्थायी साधन है। यह रबड़ का एक आवरण है जो शुक्राणुओं को महिला के गर्भाशय में प्रवेश करने से रोकता है। यह गर्भधारण को रोकने में 75 से 90 प्रतिशत तक कारगर है। इसके साथ ही यह यौन रोग व एड्स से भी बचाता है। उन्होने बताया कि अधिकांश कंडोम लेटेक्स से बने होते हैं। जिनको लेटेक्स से एलर्जी होती है वह पॉलीयूरेथीन से बने कंडोम का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

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कंडोम के लाभ - 

कंडोम अनचाहे गर्भ से बचाने, दो बच्चों के जन्म के बीच तीन साल का अंतर रखने में सहायक, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था से बचाव, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने में सहायक, यौन संचारित रोग से बचाव में सहायक है। 

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यह सावधानी बरतें ---

हर बार नए कंडोम का इस्तेमाल करें 

पैकेट पर एक्स्पायरी डेट देख लें 

पैकेट से निकालते समय कंडोम फटना नहीं चाहिए 

इस्तेमाल के बाद कंडोम को गड्ढे में दबा दें या सुरक्षित निस्तारण करें 

यौन संबंध के दौरान यदि कंडोम फट जाए या फिसल जाय तो 24 घंटे के अंदर आपातकालीन गर्भ निरोधक का इस्तेमाल करें 

कंडोम ठंडे, शुष्क स्थान में, धूप से बचाकर रखें 

पुराने और फटे पैकेट में रखे कंडोम टूट सकते हैं

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