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ई डी और सी बी आई सरकारी तोता बन गयी है -संजय चौबे .

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ई डी और सी बी आई सरकारी तोता बन गयी है -संजय चौबे  


वाराणसी,यंग इंडिया लिमिटेड़(YIL) कंपनी से जब कोई पैसे का ट्रांसफर किसी के खाते में हुआ ही नहीं तो फिर ई डी की जाँच और केश का आधार क्या है -संजय चौबे 

याचिका कर्ता शुभ्रमणियम स्वामी और AJLके शेयर होल्डर शांतिभूषण और मार्कण्डेय काटजू बताये की आजादी की आवाज अखबार नेशनल हेराल्ड ,कौमी एकता और नवजीवन को घाटे से निकालने के लिये क्या किया   -संजय चौबे 


मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेश में सरकार गिराने वाले विधायक और उनके नेताओं द्वारा होटल में ठहरने और प्राइवेट जेट से आने जाने का खर्च किसने उठाया और ई डी ने स्वतः संज्ञान लेकर जांच क्यों नहीं की -संजय चौबे 

 

उत्तर प्रदेश किसान कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता  संजय चौबे ने दिनाँक 24-7-22 को कचहरी स्थिति भाग्यश्री रेस्टारेंट में में दिन 12 बजे पत्रकार वार्ता करते हुए बताया कि 

आजादी से पहले 20 नवंबर 1937 को पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 5000 स्वतंत्रता संग्राम सेनाननियो के मदद से एसोसिएटड जर्नल्स लिमिटेड(AJL) नाम की कंपनी बनाई थी.

तत्पश्चात  कंपनी की तरफ से 9 सितंबर, 1938 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत की.

इस अखबार को ब्रिटिश सरकार के कामों की समीक्षा करने और स्वतंत्रता आंदोलन की आवाज उठाने के लिए कांग्रेस के मुखपत्र जैसा दर्जा उस समय दिया जाता था.

ब्रिटिश सरकार विरोधी गतिविधियों के आरोप में 1942 से साल 1945 तक इस अखबार के प्रकाशन पर प्रतिबंध लगा दिया गया.

इसके बाद 1946 में यह अखबार दोबारा शुरू हुआ और साल 1947 में देश की आजादी मिलने पर नेहरू ने इसके बोर्ड अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. कांग्रेस की तत्कालीन केंद्र सरकार ने AJL को दिल्ली-मथुरा रोड पर ITO के पास 1962-63 में 0.3365 एकड़ भूमि आवंटित की.  इस जमीन पर प्रिंटिंग प्रेस चलाने के लिए भवन निर्माण करने के मकसद से 10 जनवरी, 1967 को इसकी स्थायी लीज डीड AJL के पक्ष में कर दी गई.और ए जी एल द्वारा प्रकाशित तीनों अखबार 1989तक लगातार बिना किसी घाटे के प्रकाशित होते रहे। 

संजय चौबे बताया  कि 1989 के बाद से जब नेशनल हेराल्ड,नवजीवन और कौमी एकता अखबार लगातार घाटे में जाने लगा इसलिये भारी भरकम कर्ज के कारण तीनों अखबार 1990 के बाद से लगातार घाटे में रहने के कारण नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी एकता का प्रकाशन ए जी एल ने 2008 में पूरी तरह से बंद कर दिया।  उस समय इसके मैनेजिंग डायरेक्टर कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा थे.। इसके बाद कांग्रेस पार्टी द्वारा ने तीनों अखबार को फिर से प्रकाशित करने के लिये ए जी एल को लगभग 90 करोड़ का ब्याज मुक्त कर्ज दिया गया और बाद में कांग्रेस पार्टी ने इस कर्ज को माफ कर दिया। 

तत्पश्चात साल 2010 में नेशनल हेराल्ड कौमी एकता और नवजीवन को फिर से सुचारू रूप से प्रकाशित करने के लिये धारा 25 के अंतर्गत एक नान प्राफिटटेबल चैरीटेबल ट्रस्ट  कंपनी यंग इंडिया लिमिटेड बनाई गई. जिससे कोई व्यक्ति निजी लाभ न कमा सके इस कंपनी में सोनिया और राहुल गांधी की 38-38 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और 24%प्रतिशत शेयर में से कुछ शेयर  स्व .मोतीलाल बोरा स्व .आस्कर फर्नांडीज व अन्य व्यक्तियों को आवंटित किया गया। और अखबार का प्रकाशन शुरू हो गया। इस बीच bjp सांसद शुभ्रमणियम स्वामी ने आरोप लगाया कि यंग इंडियां लिमिटेड कंपनी द्वारा ए जी एल की संपत्तियों को किराए पर दे कर लाभ कमाया जा रहा है और शेयर के जरिये ए जे एल की 5000 करोड़ की संपत्तियों को हड़प लिया गया है। 

चौबे ने कहा कि  मा .शुभ्रमणियम  स्वामी द्वारा लगाए गये आरोप सत्य से परे है और राजनीति से प्रेरित है क्योंकि कंपनी के नियमानुसार मात्र मैक्सिमम शेयर होल्डिंग के जरिये कोई व्यक्ति नॉन प्राफिटटेबल कंपनी का मालिक नहीं बन जाता है और न ही उसे विक्रय का अधिकार प्राप्त हो जाता है अब रही बात किराए पर देकर प्राफिट कमाने की तो बिना प्रमाण के बेबुनियाद आरोप नहीं लगाए जा सकते क्योंकि किराए से प्राप्त धन का इस्तेमाल तीनों अखबारों  की आर्थिक हालात को सुधारने और उनके विकास के लिये किया गया  क्योंकि अभी तक की जाँच में यह साबित नहीं हो पाया है कि किसी ने भी अपने निजी फायदे के लिये रुपये पैसे का ट्रांजेक्शन किया हो और लाभ लिया हो। 

चौबे ने सवाल किया किया जब रुपये का कोई ट्रांजेक्शन किरायेदारी के पैसे  से किसी को लाभ पहुंचा नहीं तो फिर याचिकाकर्ता श्री स्वामी ने कैसे आरोप लगा दिया कि ए जी एल या यंग इंडियां लिमिटेड का व्यावसायिक इस्तेमाल कैसे हो रहा है ?

याचिका कर्ता श्री स्वामी ,श्री शांति भूषण और श्री मार्कण्डेय काटजू ने अपने स्तर  से जवाहर लाल नेहरू सहित 5000हजार स्वतंत्रता सेनानियो द्वारा स्थापित कंपनी ए जी एल द्वारा संचालित अखबार नेशनल हेराल्ड ,कौमी एकता और नवजीवन को घाटे से उबारने के लिये क्या प्रयाश किया ? इसे देश की जानना चाहता है,जबकि शांति भूषण और मार्कण्डेय काटजू ए जी एल के शेयर होल्डर थे  और क्या इनकी जिम्मेदारी नहीं बनती थी कि स्वतंत्रता संग्राम की आवाज नेशनल हेराल्ड, कौमी एकता और नवजीवन को बचाने के लिये जनरल बाडी की मीटिंग बुलाते ? और घाटे में चल रहे अखबार को घाटे से उबारने के लिये रायशुमारी के साथ साथ प्रयाश क्यों नहीं किया ?चूंकि उस समय कंपनी के डायरेक्टर स्व. मोतीलाल बोरा जी थे अब वे इस दुनियां में नहीं है अखबार को घाटे से उबारने के लिये जो बन पड़ा उन्होंने किया ?अब सवाल यह उठता है कि श्री शुभ्रमणियम स्वामी ,श्री शांति भूषण और श्री मार्कण्डेय काटजू जी आरोप लगाने के सिवाय स्वतंत्रता सेनाननियो की आवाज नेशनल हेराल्ड ,कौमी एकता और नवजीवन को कर्ज से उबारने के लिये क्या किया ?। 

श्री स्वामी का यह आरोप कितना हास्यास्पद लगता है की कांग्रेस पार्टी के राहुल गांधी ,सोनिया गांधी ने ए जी एल की संपत्तियां हथियाने के लिये यंग इंडियां कंपनी बनायी ? क्या  श्री स्वामी सहित अन्य आरोप लगाने वालों को यह नहीं पता की राहुल गांधी के परदादा श्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने सन 1950 में अपनी कुल संपत्ति 200करोड़ में से 196करोड़ रुपया(वर्तमान वैल्यू 16411करोड़ रुपया ) अपने जन्मदिन के मौके पर देश के विकास और खुशहाली के लिये देश के नाम दान कर दिया था और नेहरू गांधी खानदान ने ए जी एल जैसी बहुत सी संपत्तियों को देश के नाम कर दिया था  जिसमें से आनंद भवन जैसी प्रापर्टी प्रमुख  है। नेहरू गांधी खानदान से इंदिरा गांधी ने पंजाब को सुरक्षित रखने के लिये खालिस्तान समर्थकों को कुचल दिया और अपना बलिदान दे दिया इसी प्रकार राजीव गांधी ने तमिलनाड़ु को बचाने के लिये श्री लंका में शांति सेना भेजकर ईलम समर्थकों को कुचल दिया और ईलम समर्थकों ने राजीव गांधी की हत्या कर दिया और इसी के साथ राजीव गांधी बलिदान की बेदी पर चढ़कर देश के नाम कुर्बान हो गये। 

इस लिये प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि ई डी सत्ताधारी दल के दबाव में राहुल गांधी और सोनिया गांधी को परेशान कर छवि खराब कर रही है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण एवम राजनीति से प्रेरित है।

चौबे ने सवाल किया कि आखिर क्या कारण है ई डी और सी बी आई सत्ताधारी दल के लोगो पर सत्ता में रहते हुए मुकदमा दर्ज नहीं करती है और सत्ता से हटते ही सत्ताधारी दल के इशारे पर मुकदमा दर्ज कर बदनाम व परेशान करने कि कार्यवाही शुरू कर देती है 

अभी हाल ही में देखा गया है कि भ्रष्टाचारी नेताओं को ई डी का भय दिखाकर विपक्ष कि सरकारें गिरायी जा रही है मध्यप्रदेश ,महाराष्ट्र में पिछले दिनों ऐसा ही कुछ घटित हुआ और राजस्थान में घटित होते होते रह गया। शिवसेना के बागी सांसद महीनों तक महाराष्ट्र छोड़कर आसाम के गौहाटी में टिके रहे और इन बागी विधायकों के नेता प्राइवेट जेट व बस से आसाम से गुजरात से नागपुर और दिल्ली होते कई चक्कर लगाया और जमकर पैसा होटल ,बस और प्राइवेट जेट में जमकर पैसा खर्च हुआ लेकिन ई डी ने इस घटना का न तो स्वतः संज्ञान लिया न ही कोई जांच कि अगर सही जांच होती तो न विधायक भ्रष्टाचार के खेल में शामिल होते और सरकार गिराने वाले गिरोह का भांडा फूट जाता और जनता द्वारा चुनी हुई सरकारें दुबारा गिराई नहीं जाती।  अतः इससे स्पष्ट होता है कि अब ये दोनों संस्थाएं स्वतंत्र संस्था नहीं रह गयी  है इसी कारण भ्रष्टाचार और क्राइम रोकने में असफल लग रही है और सत्ताधारी दल का प्रतिशोध लेने में ज्यादा सफल लग रही है तो क्यों न इन दोनों संस्थाओं का विकल्प ढूंढा जाय और इनको समाप्त कर नयी व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जाय।पत्रकार वार्ता में प्रमुख रूप से संजय चौबे के अतिरिक्त देवेंद्र चौधरी एवम वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री महेंद्र वर्मा जी एवम समाज सेवी प्रभात सिंह वर्मा इत्यादि  प्रमुख रूप से सम्मिलित थे

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