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गोरखपुर,टीबी उन्मूलन में हो रही है सामुदायिक सहभागिता.

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गोरखपुर,टीबी उन्मूलन में हो रही है सामुदायिक सहभागिता


शिक्षक की श्रद्धांजलि सभा में टीबी उन्मलून का संकल्प


दो टीबी मरीजों को गोद भी लिया गया


गोरखपुर, 25 जुलाई 2022


टीबी यानि क्षय रोग के उन्मूलन में सामुदायिक सहभागिता के उदाहरण भी सामने आने लगे हैं । इसी कड़ी में मारवाड़ इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य ह्रषीकेश यादव की पुण्यतिथि की पूर्व संध्या पर टीबी उन्मूलन की सामूहिक शपथ भी ली गयी । रविवार को हुए श्रद्धांजलि सभा में शिक्षक के पुत्र और आगरा मंडल में विद्युत विभाग के अधिक्षण अभियंता ह्रदयेश यादव ने दो टीबी मरीजों को गोद लिया और उन्हें स्वस्थ होने तक मानसिक संबल एवं आवश्यक सहयोग का भरोसा दिया ।


ह्रदयेश ने बताया कि उनके पिता के मित्र डॉ सीताराम प्रसाद ने उन्हें यह सलाह दी थी कि पिता के प्रथम पुण्यतिथि पर टीबी उन्मूलन में सहयोग का संकल्प लेने व मरीजों को गोद लेने का अभिनव प्रयास करें। उन्होंने माता-पिता की याद में बनाये गये गायत्री यादव ह्रषीकेश यादव सेवार्थ ट्रस्ट की तरफ से जिला क्षय रोग केंद्र से संपर्क कर मदद मांगी । राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के जिला समन्वयक धर्मवीर प्रताप सिंह और पब्लिक प्राइवेट मिक्स (पीपीएम) समन्वयक अभय नारायण मिश्र रविवार की शाम उनके कार्यक्रम में आए और उपस्थित सैकड़ों लोगों को टीबी उन्मलून में सहयोग के लिए शपथ दिलायी। इस मौके पर एक 16 वर्षीय बाल टीबी मरीज और 62 वर्षीय टीबी मरीज को गोद भी लिया और उन्हें आवश्यक पोषक सामग्री प्रदान की । दोनों टीबी मरीजों की हरसंभव मदद की जाएगी ताकि वह जल्दी स्वस्थ हो जाएं।


कार्यक्रम में भारतीय सामग्री प्रबंधन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर एचके शर्मा, मारवाड़ इंटर कॉलेज के वर्तमान प्रधानाचार्य माधव शरण चौरसिया, विशिष्ट अतिथि डॉ सीताराम प्रसाद, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, एसएस पांडेय, एसएन पांडेय, रामनाथ गुप्ता, रेमी यादव, सोनी निगम और सीमा यादव प्रमुख तौर पर मौजूद रहीं।



*विशिष्ट अवसरों पर ले सकते हैं गोद*


प्रभारी जिला क्षय रोग अधिकारी एवं जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ गणेश प्रसाद यादव ने बताया कि जीवन के विशेष अवसर जैसे जन्मदिन, वैवाहिक वर्षगांठ आदि पर भी टीबी मरीजों को गोद लेकर इन दिवसों को खास बनाया जा सकता है। गोद लेने का आशय एक किलो भुना चना, एक किलो मूंगफली, एक किलो गुड़, एक किलो सत्तू, एक किलो तिल या गजक, एक किलो अन्य पोषक सामग्री की पोषण पोटली मरीज को स्वेच्छा से उपलब्ध कराना है और मरीज का समय-समय पर हालचाल लेते रहना है। टीबी के मरीज अक्सर बीच में दवा छोड़ देते हैं। इस कारण स्थिति गंभीर हो जाती है। अगर गोद लेने के बाद उन्हें लगातार दवा जारी रखने के लिए प्रेरित किया जाए तो मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकते हैं ।


मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ आशुतोष कुमार दूबे के दिशा-निर्देशन में उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ विराट स्वरूप श्रीवास्तव की देखरेख में टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए समुदाय को प्रेरित करने का अभियान जारी है।


*कुष्ठाश्रम का हुआ निरीक्षण*

 

जिला कुष्ठ रोग अधिकारी ने राजेंद्रनगर कुष्ठाश्रम और राजेंद्रनगर स्थित मानसिक रोग आश्रम का रविवार को ही निरीक्षण भी किया। वहां रोगियों के बीच विशेष आवश्यक दवा एवं उपकरण वितरित किये गये और उन्हें परामर्श दिया गया । आश्रम के सचिव सुरेश सिंह, मानसिक रोग कार्यक्रम के चिकित्सक डॉ अमित शाही, कंसल्टेंट डॉ भोला गुप्ता, एनएमए महेंद्र चौहान, फिजियोथेरेपिस्ट आशिफ खां और रवि श्रीवास्तव प्रमुख तौर पर मौजूद रहे ।

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