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सीतापुर,जनपद के 6.08 लाख बच्चों को दी जाएगी विटामिन ए की खुराक.

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सीतापुर,जनपद के 6.08 लाख बच्चों को दी जाएगी विटामिन ए की खुराक

- बाल स्वास्थ्य पोषण माह की शुरुआत आज से 

सीतापुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत तीन अगस्त से बाल स्वास्थ्य पोषण माह की शुरुआत होगी। इसमें नौ माह से पांच वर्ष तक के करीब 6.08 लाख बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाई जाएगी। अभियान पूरे माह चलेगा। सीएमओ डाॅ. मधु गैरोला ने बताया कि बाल स्वास्थ्य पोषण माह विटामिन-ए संपूर्ण कार्यक्रम टीकाकरण का एक अभिन्न अंग है। यह अभियान प्रति वर्ष दो बार छह-छह माह के अंतराल पर नियमित टीकाकरण, छाया ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (छाया वीएचएसएनडी) सत्रों पर आयोजित किया जाता है। 

उन्होंने बताया कि विटामिन ए की खुराक देने के लिए डिस्पोजल चम्मच का ही प्रयोग होगा। अधिकतर बच्चों में विटामिन ए की कमी मिलती है। इसे रोकने के लिए अभियान के तहत प्रत्येक बच्चे को विटामिन ए की नौ खुराक दिए जाने का प्रावधान है। यह खुराक छाया ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस के दौरान दी जाएगी। कोविड को देखते हुए विटामिन ए देने के दौरान आशा कार्यकर्ता को इस बात का ध्यान देना होगा कि बूथ पर एक समय में 10 से अधिक बच्चे एकत्र न होने पाएं। बुखार या खांसी तथा सांस लेने में तकलीफ हो तो उसे बूथ पर ले जाकर दवा नहीं पिलाया जाएगा। प्रत्येक ब्लाक में 20 सत्रों का आयोजन होगा, जिसकी निगरानी चिकित्साधिकारी करेंगे। विटामिन ए वसा में घुलनशील विटामिन है। यह बच्चों को रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। यह कोविड-19 से बचाव में भी लाभकारी है।

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*विटामिन ए से यह होता है लाभ ---*

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी व एसीएमओ डॉ. पीके सिंह ने बताया कि विटामिन ए के सेवन से शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है। आंखों की परत यानि कार्निया सुरक्षित होती है। इससे बाल मृत्यु दर में कमी, दस्त, खसरा व मलेरिया से होने वाली मृत्यु में कमी, आंखों के रोग जैसे रतौंधी से बचाव और कुपोषण में कमी जैसे फायदे मिलते हैं। यह शारीरिक विकास में भी उपयोगी है। 

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बैठक कर बनाई रणनीति ---

कार्यक्रम के सफल संचालन को लेकर सीएमओ कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग और बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के साथ अन्तर्विभागीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में कार्यक्रम को सफल बनाने पर मंथन किया गया। इसके साथ ही अभियान के अंतर्गत कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों की भी पहचान कर उनका समुचित उपचार किए जाने पर चर्चा की गई।

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