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अटरिया,खेत के ब्लेट युक्त तार से गर्भवती गाय का गला कटने से गंभीर रूप से घायल मदद के नाम पर पुलिस का विवादित बयान.

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अटरिया,खेत के ब्लेट युक्त तार से गर्भवती गाय का गला कटने से गंभीर रूप से घायल मदद के नाम पर पुलिस का विवादित बयान

रिपोर्ट, ज्ञानेन्द्र मिश्रा

अटरिया सीतापुर जयपुर की कोतवाली सिधौली क्षेत्र के थाना अंतर्गत बालेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध शिव मंदिर की गाय महेश रावत बेड शाहपुर गांव निवासी खेत के पास पहुंच गई चारे की तलाश में वह अंदर प्रवेश करने का प्रयास कर रही थी किंतु किसान के द्वारा खेत रखवाली के लिए खेत में ब्लेड युक्त तार लगाए जाने से गर्भवती गाय कागला बुरी तरह से कट गया जिससे सतीश से रक्त की धारा बहने लगी वही सावन माह के अंतिम सोमवार पर शिव भक्त उसी रास्ते से शिव मंदिर में पूजा अर्चना करने जा रहे थे उक्त हादसे को देखकर पुजारी को सूचना दी गई मौके पर पहुंचे पुजारी ने गोवंश की हालात देख चिकित्सीय मदद के लिए काफी प्रयास किया इसी क्रम अटरिया एस एच ओ मुकेश वर्मा से फोन के माध्यम से सहायता मांगी गई किंतु पुलिस द्वारा मदद के नाम पर हाथ खड़े करते हुए विवादित शब्दों में मामले को गौ रक्षक संघ के लोगों से संपर्क करने को कहा गया इससे साफ जाहिर होता है कि क्षेत्र में हो आकाश को लेकर स्थानीय पुलिस आखिर क्यों संजीदगी नहीं दिखाती


कटीले तारों पर क्या है नियम


कृषि गृह या अपनी खाली जमीन पर कंटीले तार लगाने, उनमें विद्युत प्रवाह (करंट) छोड़ने या फलकदार (ब्लेड) वाली तारें लगाने पर  प्रतिबंध लगा दिया था।  इसके लिए धारा-144 लगा दी थी। अगर जिले में कहीं भी ऐसे तार लगे हैं तो उन्हें तुरंत ही हटा लिया जाए। अन्यथा धारा-144 के तहत कानूनी कार्रवाई तो सक्ति है। साथ ही आदेशों की अवहेलना करने वाले व्यक्ति के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-188, पशुक्रूरता कानून-1960 की धारा-11 (1) और गोवंश संरक्षण व संवर्धन कानून-2015 की धारा-2(एम) धारा-3 के तहत कानूनी कार्रवाई करते हुए दंडित भी किया जा सकता हैं जिलाधीश ने दंड प्रक्रिया नियमावली - 1993 की धारा-144 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आदेश जारी किए गए थे। आदेश में कहा गया था कि जिलाधीश के संज्ञान में लाया गया है कि जिले में कई कृषिगृहों, खाली भूखंड और खेतों पर चाहरदीवारी करने के लिए ऐसी कंटीली तार लगाई हुई हैं। जिससे वन्य प्राणी और गोधन आदि घायल हो जाते हैं। कई बार उनकी तड़पकर मौत हो जाती है। फसल बचाने को जानवरों पर शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई थी। जिसमें गोधन के प्रति क्रूरता को छापा गया था। जिलाधीश ने जिले में गोधन के संरक्षण के लिए गोशालाओं को निर्माण शुरू करवाया गया था। आदेशों के प्रति लोगों को जागरूक करने और आदेशों के पालन लिए सभी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, उपनिदेशक, पशुपालनविभाग के अधिकारियों और संबंधित उपमंडलीय मैजिस्ट्रट को निर्देशित किया था। प्रशासनिक टीमें ग्राम पंचायत की मदद से ऐसे तारों को तुंरत हटवाने आदेश दिए गए थे।

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