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कानपुर,साल दर साल प्रसवपूर्व जांच का बढ़ रहा है ग्राफ नौ माह में चार बार प्रसवपूर्व जांच, गर्भवती पर ना आये कोई आँच .

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कानपुर,साल दर साल प्रसवपूर्व जांच का बढ़ रहा है ग्राफ नौ माह में चार बार प्रसवपूर्व जांच, गर्भवती पर ना आये कोई आँच 


प्रसव से पूर्व गर्भवती महिलाओं को कम से कम चार बार जरूर जांच जरुरी


कानपुर नगर 28 अगस्त 2022।


जिले में प्रसवपूर्व जांच के प्रति जागरूकता बढ़ी है। यह बात साबित कर रही है नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वेक्षण (एनएफएचएस) -5 की रिपोर्ट। इसके अनुसार कानपुर जिले में 69.9 प्रतिशत महिलाओं की गर्भावस्था के दौरान चार बार प्रसवपूर्व जांच हुई। जबकि एनएफएचएस - 4 में यह आंकड़ा 36 प्रतिशत ही था। यह कहना है अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व आरसीएच नोडल डॉ एसके सिंह का। 


डॉ सिंह ने कहा कि मां बनना एक स्त्री के लिए उसके जीवन का सबसे सुखद अहसास है। जच्चा बच्चा की उचित देखभाल बहुत ही जरूरी होती है। गर्भावस्था का पता चलते ही प्रसव पूर्व सभी आवश्यक जांच के लिए अपने क्षेत्र की आशा से संपर्क करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर एएनएम व चिकित्सक से राय ली जा सकती है। जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रसव पूर्व जांच की संख्या को लगातार बढ़ाने की कोशिश जारी है। आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं की मदद से लगातार इसके लिए जागरूकता लाई जा रही है।


जिला महिला चिकित्सालय (डफ़रिन) की मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका डॉ सीमा श्रीवास्तव ने बताया गर्भवती महिला की नौ माह में चार बार प्रसवपूर्व जांच की जाती है। प्रसव पूर्व जांच को एंटी नेटल केयर या एएनसी भी कहते हैं। इनमें प्रथम जांच 12 सप्ताह के भीतर या गर्भावस्था का पता चलने के साथ होती है। दूसरी जांच 14 से 26 सप्ताह, तीसरी जांच 28 से 34 सप्ताह तथा चौथी जांच 36 सप्ताह से प्रसव के समय तक के बीच होती है।


एएनसी में मिलती है यह सुविधा

प्रसवपूर्व जांच में बीपी, हीमोग्लोबिन, वजन, लंबाई, पेशाब में शक्कर व प्रोटीन जांच सहित एचआईवी व अन्य प्रकार की आवश्यक जांच शामिल हैं। इन सब जांच के साथ ही गर्भवती महिलाओं को टेटनस का इंजेक्शन, आयरन व फॉलिक एसिड की टैबलेट दिये जाते हैं। यदि महिला में खून की कमी होती है तो पोषण संबंधी सलाह व दवाई आदि दी जाती है। 

क्या कहते हैं आँकड़े 

जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता हरिशंकर मिश्रा ने बताया की एचएम्आईएस पोर्टल पर फीडिंग के अनुसार जनपद में वर्ष 2021-22 में 127915 एएनसी पंजीकृत की गईं। इसमें यानी 60606 गर्भवतियों ने नौ माह में चार बार एएनसी जांच करवाई। इसी तरह वर्ष इस साल अप्रैल माह से जुलाई तक 57272 में से 25632 यानी गर्भवतियों ने चार बार एएनसी करवाने में दिलचस्पी दिखाई है।

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