Breaking News

ब्रेकिंग न्यूज़

गोरखपुर,छोटे परिवार के बड़े फायदे समझा रहीं आशा कार्यकर्ता चंदा.

post

गोरखपुर,छोटे परिवार के बड़े फायदे समझा रहीं आशा कार्यकर्ता चंदा


क्षेत्र की 18 महिलाओं और तीन पुरुषों को प्रेरित कर नसबंदी सेवा दिलाई


गोरखपुर, 30 अगस्त 2022


छोटे परिवार की देखभाल अच्छी तरह  से हो सकती है । परिवार के सभी लोग स्वस्थ और खुशहाल रह सकते हैं।  इसके लिए परिवार नियोजन के अस्थायी या स्थायी साधनों को सरकार निःशुल्क उपलब्ध करवा रही है । यह संदेश घर-घर पहुंचाने का कार्य कर रही हैं चरगांवा ब्लॉक की बड़ी रेतवहिया की आशा कार्यकर्ता चंदा चौहान । इन संदेशों को समुदाय में पहुंचाने के दौरान अगर कोई उनके परिवार के बारे में सवाल पूछता है तो वह खुद के सुखी जीवन की भी नजीर देती हैं। उनके प्रयासों का ही नतीजा है कि नसबंदी की सेवा अपनाने से हिचकने वाले पुरुष भी इस सेवा को अपनाकर परिवार को खुशहाल बनाने के लिए आगे आ रहे हैं ।


चंदा चौहान समुदाय में बताती हैं कि उनके दो ही बच्चे हैं जो अब बड़े भी हो चुके हैं । उनका जीवन सुखी और खुशहाल है।चंदा की  कहानी सुनने के बाद समुदाय से भी लोग परिवार नियोजन सेवा से जुड़ने के लिए आसानी से तैयार हो जाते हैं । चंदा ने इस तरह वर्ष 2019 से लेकर 2022 के बीच 18 महिलाओं के अलावा तीन पुरुषों को भी नसबंदी की सेवा अपनाने के लिए राजी कर लिया । वह अस्थायी साधनों के बारे में भी समुदाय को जागरूक कर रही हैं । चंदा ने वर्ष 2016 से लेकर वर्ष 2022 तक कुल 102 महिलाओं का संस्थागत प्रसव करवाया और इन सभी महिलाओं को पीपीआईयूसीडी अपनाने के लिए भी प्रेरित किया, जिसकी नतीजा रहा कि 80 महिलाओं ने पीपीआईयूसीडी भी अपना लिया । क्षेत्र की आठ महिलाओं को अंतरा, आठ को आईयूसीडी, 20 महिलाओं को छाया, 85 को माला एन और 10 को ईसीपी की सेवा दे चुकी हैं। कुल 3456 कंडोम भी क्षेत्र में वितरित किये हैं ।


चंदा बताती हैं कि सबसे ज्यादा चुनौती पुरुष नसबंदी के मामले में आती हैं। आमतौर पर पत्नियां ही पुरुष को नसबंदी कराने से रोकती हैं। उन्हें लगता है कि उनके पति की कार्यक्षमता कम हो जाएगी। पत्नी के विरोध के बाद पति नसबंदी को तैयार नहीं होते हैं। ऐसे पुरुषों को वह चरगांवा पीएचसी लेकर जाती हैं जहां सहायक शोध अधिकारी (एआरओ) रामचंद्र और स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी मनोज कुमार उनकी काउंसिलिंग करते हैं। इस तरह लगातार प्रयास करने पर पुरुषों को भी तैयार करने में सफलता मिल जाती है । परिवार नियोजन सेवाओं से महिलाओं को जोड़ने में एएनएम श्वेता सिंह उनकी मदद करती हैं।


*चंदा की सलाह के बाद लिया निर्णय*


चरगांवा ब्लॉक के 38 वर्षीय सोहन (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उन्हें तीन बच्चे हो चुके थे और उन्हें आशा चंदा ने सचेत किया कि परिवार नियोजन का स्थायी साधन अपनाने में वह देरी कर चुके हैं । उन्होंने आशा को बताया कि उनकी पत्नी नसबंदी नहीं करवाना चाह रही हैं । आशा कार्यकर्ता ने उन्हें नसबंदी के लिए प्रेरित किया और बताया कि पुरुष नसबंदी सरल, आसान और सुरक्षित है|  इससे शारीरिक कार्यक्षमता पर कोई असर नहीं पड़ता है । उनकी बात की पुष्टि के लिए सोहन ने यूट्यूब चैनल से भी जानकारी ली, फिर भी उनके मन में डर बना रहा। आशा ने कहा कि वह उनकी मुलाकात ऐसे लोगों से भी करा देंगी जो पुरुष नसबंदी के बाद स्वस्थ जीवन जी रहे हैं । इससे उनका भरोसा बढ़ा और उन्होंने नसबंदी करवा ली । वह बताते हैं कि नसबंदी के बाद वह खुद गाड़ी चलाकर घर गये और उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई।


परिवार नियोजन सेवाएं हुईं मजबूत


प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ धनंजय कुशवाहा की देखरेख में चरगांवा ब्लॉक का परिवार नियोजन कार्यक्रमों में पिछले दो वर्षों से पहला स्थान रहा है। इसमें चंदा चौहान जैसी आशा कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा है। 


मनोज कुमार, स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी, चरगांवा ब्लॉक

Latest Comments

Leave a Comment

Sidebar Banner
Sidebar Banner
Sidebar Banner