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शाहजहांपुर के एक समाज में चलती है खुद की अदालत और खुद का कानून.

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शाहजहांपुर के एक समाज में चलती है खुद की अदालत और खुद का कानून

दिनेश मिश्रा

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शाहजहांपुर

हमारे देश में पंचायतें अभी भी चल रही है।जहां पर खुद का कानून होता है और फैसले भी तुरंत होते हैं।यहां तक कि गंभीर मामले भी पुलिस के पास नहीं जाते।इन्हीं अदालतो में सुलझाया जाते हैं।वर्ष में एक बार अदालत लगती है।जिसमें पूरे जिले के वर्ष भर हुए मामलों को रखा जाता है और उनका फैसला होता है। जुर्माना भी सजा के तौर पर तुरंत भरना पड़ता है और ज्यादा बड़ा

मामला होने पर समाज से बहिष्कार भी किया जाता है।

शहर में भठियारे समाज के लगभग पांच हजार लोग रहते हैं जो शहर के अलग-अलग मोहल्लों में निवास करते हैं।जुलाई से अक्टूबर के बीच यहां आते हैं और फिर अपने व्यवसाय के लिए दिल्ली समेत अन्य शहरों में चले जाते हैं।शहर के मंडी, बंगले के नीचे, पक्का पुल, खिरनी बाग, बाडूजई पेशावरी में भठियारे समाज के लोग निवास करते हैं।इनका अपना एक अलग ही कानून है।जिसके तहत कोई भी विवाद अगर समाज में होता है। तो उसका मामला पुलिस के पास नहीं जाता है।पंचायत ही उसका निस्तारण करती है।अगर छोटे-मोटे मामले हैं।तो तत्काल निपटाये जाते हैं।अगर बड़े मामले हैं।तो वर्ष में एक बार लगने वाली बड़ी अदालत में उनका निपटारा होता है।समाज का बहुत ही कठोर कानून है।जिसमें बड़े अपराध पर व्यक्ति को समाज से बहिस्कृत कर दिया जाता है।अगर कोई व्यक्ति समाज के खिलाफ जाता है।तो उसे भी समाज से जुदा कर दिया जाता है और उसका हुक्का पानी बंद कर दिया जाता है। विवाह के लिए भी  कानून अलग है।यहां पर बारात में बैंड बाजे नहीं बजते।कोई लेन-देन नहीं होता।किसी तरीके का दहेज नहीं लिया जाता है। इस समाज की जो अदालत लगती है। उसके अलग-अलग चौधरी भी है। जिसमें मंडी मोहल्ले के राशिद चौधरी बंगले के नीचे, सुलेमान हाजी, पक्का पुल शरीफ चौधरी खिरनीबाग बशीर चौधरी और वहीद चौधरी, बाडूजई पेशावरी शेरा और मजीदचौधरी तथा उनके परिजनों को नियुक्त छोटी अदालतें ही निपटा देती हैं।


*होटल में लगी थी चार दिवसीय अदालत 26 मामलों का हुआ निपटारा 6.50लाख वसूला गया जुर्माना*


इस बार दुर्गा टाकीज वर्तमान में जिसे हिंदुस्तान मैरिज लान कहते हैं। वहां पर 20 से 25 अगस्त तक अदालत का आयोजन किया गया था।6 दिन चली इस अदालत में 21 केस मामूली विवाद के थे। वह घर से ही निपटाए गए।लेकिन 3 बड़े फैसले हुए और यह आपसी विवाद था।उसे भी निपटाया गया। इन मामलों में 6.50 लाख जुर्माना वसूल किया गया जिससे 6 दिन चली अदालत में प्रतिदिन आ रहे खर्च का भुगतान किया गया। इन अदालतों में सबसे ज्यादा गंभीर मामले शादी विवाह के आते हैं।जिनका निपटारा किया जाता है।अगर लड़की को ज्यादा प्रताड़ित किया गया।उसके साथ बहुत ही अत्याचार हुआ तो जुर्माने के साथ दस वर्ष के लिए लड़के को समाज से बहिष्कृत कर दिया जाता है और उससे जुर्माना भी अधिक लिया जाता है। बताया जाता है कि अगर ज्यादा और भी गंभीर अपराध किया है तो अदालत में उसकी सामाजिक बेइज्जती होती है।ताकि वह कभी भी ऐसी गलती न कर सके। बताया जाता है कि अगर लड़के ने गलती की है तो उससे 2.50 से 3 लाख तक का जुर्माना वसूल किया जाता है और वह जुर्माना लड़की वाले को दिया जाता है। *यह है निराली सजा और समाज को संदेश भी*

 इन अदालतों में एक ऐसी सजा भी दी जाती है। जो काफी निराली है। बताया जाता है कि अगर किसी ने अपनी पत्नी को छोड़ दिया है। तो उसकी दोबारा शादी होगी तो उसे कुंवारी लड़की से शादी करने की अनुमति नहीं होगी।बल्कि वह उस औरत से शादी कर सकता है।जिसकी छूटौती हो चुकी हो। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि समाज में परिवार के विघटन को रोका जा सके और पति पत्नी आपस में मिलजुल कर रह सके।

*भठियारे समाज का सब्जी और पालेज का है व्यवसाय*


भठियारे समाज के लोग अक्टूबर में यहां से दिल्ली अहमदाबाद जयपुर आगरा सहित विभिन्न स्थानों पर चले जाते हैं वहां पर खेतों को किराए पर लेकर उसने सब्जी के अलावा खरबूज, तरबूज आदि का व्यवसाय बड़े स्तर पर करते हैं।जब बरसात का मौसम शुरू हो जाता है।उससे पहले ही वह अपने घर वापस आ जाते हैं।जुलाई में घर वापसी होने के बाद सबसे पहले वह अपने मकानों की मरम्मत कराते हैं। उसके बाद पंचायत का

आयोजन होता है।तत्पश्चात शादी करने की अनुमति मिलती है। शादी भी एकदम सादा फैशन में होती हैं। कोई दिखावा नहीं कोई दहेज नहीं और न ही बैंड बाजा का प्रयोग किया जाता है ।


*समाज की चलने वाली अदालतों में कठोर दंड का भी प्रावधान*


जिसके तहत जो व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ अमानवीय कृत्य ज्यादा अत्याचार करता है।तो उसे जुर्माना धरने के अलावा समाज से अलग रहने की भी सजा दी जाती है।10 वर्ष तक वह समाज से बहिष्कृत कर

दिया जाता है न ही कोई उसे संबंध रखेगा और न ही उसे समाज में कोई जगह देगा। *गवाही का भी है अनोखा तरीका* 

भठियारी समाज की अदालतों में गवाही का भी एक कठोर कानून है।अगर कोई किसी मामले में गवाही देने आता है तो सबसे पहले उसे अपने लड़कों की कसम खानी पड़ेगीःअगर गवाही देते समय उसने अपने लड़कों की कसम नहीं खाई और वह झूठा गवाह निकला तो 6100000 रु० जुर्माना तत्काल भरना पड़ेगा। अन्यथा समाज से उसका बहिष्कार कर दिया जाएगा।इस कानून की बजहसे लोग झूठी गवाही देने से कतराते हैं और तब सही निर्णय हो पाता है।

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