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इटावा,सैफई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मनाया गया विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस.

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इटावा,सैफई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर मनाया गया विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस


बदलती जीवन शैली व खुद के लिए समय न निकालना बन रहा है निराशा का कारण - डॉ सुनील


जिला अस्पताल के कमरा नंबर 124 में संचलित है मन कक्ष 


इटावा 10 सितंबर 2022।

दुनियाभर में बढ़ती आत्महत्या को रोकने को लेकर लोगों को जागरूक करने के लक्ष्य से हर साल 10 सितंबर को यह खास दिन मनाया जाता है। इस दिवस के अवसर पर शनिवार को सैफई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया |

इस कार्यक्रम में चिकित्सा अधीक्षक डॉ सुनील कुमार ने कहा कि अक्सर बदलती जीवन शैली और खुद के लिए कम समय निकालना लोगों की निराशा का कारण बनता है और पूरे दिन व्यस्तता तनाव से कई तरह के मानसिक बदलाव आते हैं जो कहीं ना कहीं निराशा को बढ़ाते हैं और आत्महत्या का कारण बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग मानसिक तनाव से जूझते हैं वह अपने आप को मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने के लिए अच्छा खाना खाएं,शारीरिक व्यायाम,योग अपनी जीवन शैली में अपनाएं और अपने छोटे-छोटे शौक जैसे खेल,साहित्य पढ़ना, गाने सुनना और रचनात्मक क्रियाएं करते रहें जिससे मानसिक रूप से वह अच्छा महसूस करेंगे।

जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाई में तैनात साइकाइट्रिक सोशल वर्कर दिलीप चौबे ने कार्यक्रम में बताया की आत्महत्या का विचार करने वालों को दो तरह का उपचार दिया जाता है पहला साइकोथेरेपी दूसरा फैमिली थेरेपी। साइकोथेरेपी के द्वारा मरीज को कुछ दवाओं व व्यायाम की सहायता से मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए जाने का प्रयास किया जाता है। दूसरी फैमिली थेरेपी द्वारा मानसिक रूप से अस्थिर होने पर रोगी घर के सबसे प्रिय सदस्य के द्वारा संवाद स्थापित कर उसके अंदर आत्मविश्वास जगा कर रोगी के अंदर की नकारात्मकता को खत्म किया जा सकता है।

दिलीप ने बताया कि जब कोई भी इंसान मानसिक तनाव से जूझ रहा होता है तो उसके व्यवहार में पहले की अपेक्षा कुछ बदलाव देखने को मिलता है देखा जाए तो ऐसे लोग अकेले रहते हैं किसी के साथ बात नहीं करते छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करते हैं रात में कम सोते हैं और पारिवारिक या सामाजिक कार्यक्रमों से दूरी बना लेते हैं और धीरे-धीरे डिप्रेशन का शिकार होकर आत्महत्या जैसे विचार से ग्रसित हो जाते हैं।

कार्यक्रम में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ आशीष और अन्य स्टाफ के साथ स्थानीय लोगों ने भाग लिया जिन्हें कार्यक्रम के दौरान पंपलेट बांटकर अन्य लोगों को भी जागरूक करने के लिए कहा गया।

ऐसे कर सकते हैं बचाव

मानसिक रूप से अस्थिर लोगों को ज्यादा से ज्यादा सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए करें प्रोत्साहित  व  खुश रखने की कोशिश करें। अगर घर में कोई सदस्य तनाव में रहता है तो उस पर किसी भी प्रकार की नकारात्मक प्रतिक्रिया न दें। अपने स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र व जिला अस्पताल के मन कक्ष कमरा नंबर 124 में मनोचिकित्सक को अवश्य दिखाएं। झाड़-फूंक या तंत्र मंत्र से दूर रहें।

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