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गोरखपुर,टीबी उन्मूलन की लड़ाई में भागीदार बनेगा नगर निगम.

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गोरखपुर,टीबी उन्मूलन की लड़ाई में भागीदार बनेगा नगर निगम


राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम की टीम ने किया संवेदीकरण


ब्रांड एंबेसडर व सदर सांसद रवि किशन ने पांच टीबी रोगियों को गोद लिया


गोरखपुर, 12 सितम्बर 2022


वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन के संकल्प को पूरा करने में नगर निगम के पार्षद और कर्मचारी भी भागीदारी निभाएंगे । इस संबंध में राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की गोरखपुर ईकाई की टीम ने नगर निगम से जुड़े सभी लोगों को सोमवार को हुए एक कार्यक्रम में जागरूक किया । राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के ब्रांड एंबेसडर व सदर सांसद रवि किशन की उपस्थिति में यह आयोजन हुआ । सांसद ने इस मौके पर पांच टीबी रोगियों को गोद लिया। सांसद के साथ साथ महापौर डॉ सीताराम जायसवाल की मौजूदगी में नगर निगम सभागार मौजूद सभी लोगों ने टीबी उन्मूलन के लिए शपथ ली।


इस मौके पर सांसद ने अपील की कि टीबी मरीजों को ढूंढने में सभी लोग मददगार बने। लोग स्वेच्छा से टीबी रोगियों को गोद लेने के लिए आगे आएं। टीबी मरीजों से भेदभाव नहीं करना है और उनको मानसिक संबंल देना है ताकि वह जल्दी स्वस्थ होकर समाज की मुख्य धारा में शामिल हो सकें। उन्होंने टीबी उन्मूलन में स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा की टीबी के प्रति समाज में फैली मिथक व भ्रांतियों पर प्रहार करना होगा।


महापौर ने कहा कि नगर निगम इस बीमारी के उन्मूलन में सक्रिय सहयोग देगा। उपसभापति ऋषीमोहन वर्मा ने बताया कि सभी पार्षदों और अन्य लोगों ने संकल्प लिया है कि अपने क्षेत्र के हर एक संपर्की को जागरूक करेंगे और टीबी मरीजों की मदद करेंगे। नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने मोहल्ला निगरानी समितियों के जरिये टीबी उन्मूलन के लिए प्रयास करने की अपील की।


संवेदीकरण कार्यक्रम में सीएमओ डॉक्टर आशुतोष कुमार दूबे द्वारा बताया गया कि दो सप्ताह से अधिक की खांसी टीबी हो सकती है, मगर प्रत्येक खांसी टीबी नहीं होती है।  अगर यह दिक्कत है तो टीबी की जांच अवश्य कराएं । शरीर में टीबी मुख्यतया फेफड़ों को ही प्रभावित करती है लेकिन शरीर के अन्य अंगों में भी टीबी होती है । नाखून और बाल छोड़ कर शरीर के किसी भी अंग में टीबी हो सकती है। ऐसी टीबी एक्सट्रा पल्मोनरी टीबी कहलाती है और इसकी पहचान विशेषज्ञों द्वारा ही की जाती है । गैर फेफड़े वाले टीबी मरीज तो संक्रमण नहीं फैलाते लेकिन फेफड़ों के टीबी का धनात्मक मरीज अगर उपचार नहीं लेता है तो साल भर में दस से पंद्रह लोगों को मरीज बना देता है। खांसी के अलावा अगर रात में पसीना और बुखार आए, वजन तेजी से घटने लगे, भूख न लगे और बलगम में खून आए तो यह भी टीबी का लक्षण हो सकता है। ऐसे लोगों को तुरंत टीबी जांच के लिए प्रेरित करना है । यदि टीबी की समय से पहचान हो जाए तो छह महीने के इलाज में भी यह बीमारी ठीक हो जाती है ।


इस मौके पर उप जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ विराट स्वरूप श्रीवास्तव, जिला कार्यक्रम समन्वयक धर्मवीर प्रताप सिंह और पीपीएम समन्वयक अभय नारायण मिश्र ने टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला । कार्यक्रम में सांसद के पीआरओ पवन दूबे, सहयोगी सोनू द्विवेद्वी, उप नगर आयुक्त संजय शुक्ला, महापौर के पीए मो आरिफ सिद्दीकी, नगर निगम से एजाज आलम व पवन मिश्रा, स्वास्थ्य विभाग से डॉक्टर भोला, डॉक्टर एमए बेग, मो आसिफ, मनीष त्रिपाठी, केशव धर दूबे और अभयनंदन प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।


*निःक्षय पोषण योजना की दी गयी जानकारी*


प्रभारी जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ गणेश प्रसाद यादव ने बताया कि नगर निगम के लोगों को निःक्षय पोषण योजना के बारे में भी जानकारी दी गयी। उन्हें बताया गया कि टीबी के एक नये मरीज को खोजने पर गैर सरकारी व्यक्ति को 500 रुपये दिये जाते हैं । मरीज को इलाज चलने के दौरान 500 रुपये प्रति माह पोषण के लिए दिये जाते हैं । इस मौके पर अपील की गयी कि लोग आगे आकर टीबी के मरीजों को गोद लें । दवाओं के साथ मानसिक संबंल मिलने से टीबी से लड़ाई आसान हो जाती है। निःक्षय पोषण योजना दो के बारे में बताया गया कि लोग स्वयं इस योजना के तहत पंजीकरण करने के बाद टीबी मरीजों की मदद कर सकते हैं । टीबी मरीजों को गोद लेने से आशय उनको पोषक सामग्री प्रदान करना और उनका हालचाल लेते रहना है ।


सात स्वास्थ्यकर्मी हुए सम्मानित

टीबी उन्मूलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अभय नारायण मिश्रा, जितेंद्र गिरी, सुरेंद्र गौड़, राजेश गुप्ता, धर्मवीर प्रताप सिंह, राजेश सिंह और मिर्जा आफताब अहमद बेग को सम्मानित किया गया।

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