उज्जैन, नंदिनी लोकमित्र राष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय दिवस महिलाओं से जुड़े अनछुए पहलुओं और नेतृत्व पर हुई खुली चर्चा

15 प्रांतों से आए प्रतिभागियों ने मणिपुर हिंसा एवं वाराणसी साधना केन्द्र राजघाट हेतु क्षोभ प्रस्ताव हुआ

उज्जैन।
‘अंकित ग्राम’ सेवाधाम आश्रम में अंकितग्राम, सेवाधाम आश्रम के परोक्ष समाजसेवी मास्टर अंकित गोयल के 39वें जयन्ती पर्व पर 39 दिवसीय 32वें वर्षा मंगल महोत्सव ‘‘अंकितग्राम वर्षा मंगल राष्ट्रोत्सव’’ का तीन दिवसीय नंदिनी लोकमित्र राष्ट्रीय सम्मेलन के द्वितीय दिवस 15 प्रांतों से आए प्रतिभागियों और अंकितग्राम, सेवाधाम आश्रम के 750+ सदस्यों ने मणिपुर में हो रही महिलाओं पर हिंसा एवं वाराणसी साधना केन्द्र राजघाट हेतु क्षौभ प्रस्ताव करते हुए कहा गया कि दोनों जगहों पर शांति स्थापित हो और नंदिनी शिविर के द्धितीय सत्र में मुख्य रूप में महिलाओं से जुड़े अनछुपे पहलुओं और नेतृत्व करने की दिशा में जागरूकता प्रदान करने हेतु खुली रूप से चर्चा हुई।

सर्वप्रथम जमनालाल बजाज पुरस्कार प्राप्त विमला बहन ने कहा कि महिलाए सामूहिक साधना के लिए समाज में आगे आए ताकि समाज में जो दुख और समास्याऐं है उनका निदान परिवार के साथ में मिलकर कर सके। उनका आधार सहजीवन होना चाहिए। समाज का कोई भी वर्ग दुखी ना रहे उसके लिए मातृशक्ति ही चिंता करेगी। माँ जैसे परिवार अच्छे से चलाती है उसी तरह से गांव को चलाने के लिए तैयार हो जिस दिन गांव अच्छा चल जावेगा उस दिन सारा राष्ट्र सुंदर हो जाएगा। बाबा विनोबा ने इसी लिए बहनों का अव्हान किया था कि वह समाज में नेतृत्व करने के लिए आगे आए ताकि गांव की समस्या का हल गांव में हो सके।

द्धितीय वक्ता डाॅ. निशा बाला त्यागी, दिल्ली ने कहा कि महिलाऐं शिक्षा के काम को सम्हाले जिससे जो शिक्षित समाज निकले वो समाज के दुख के प्रति संवेदनशील हो। माताओं के मुख से शिक्षा होना बाबा विनोबा ने भी कहा था, आज उसकी जरूरत है।

तृतीय वक्ता डाॅ. भारती, दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर ने कहा कि गांव में महिलाओं को जागरूक करने की अधिक आवश्यकता है क्योकि उनका शोषण गांव स्तर पर ही होता है। उस शोषण को रोकने का काम बहनों को ही करना पड़ेगा। महिलाऐं एक साथ बैठकर सामूहिक हल सोचने का काम करें ताकि किसी प्रकार के विवाद से हमारा गांव बच सके।

चुतर्थ वक्ता श्रीमती उषा शर्मा, बिहार ने कहा कि आज का ज्वलंत मुद्दा हिंसा है , आज मणिपुर में जो हिंसा हो रही है वह बहुत ही शर्मनाक घटना है, हमारी बहुत सारी बहने आज मणिपुर हिंसा से पीड़ित हो रही है हम गांधी-विनोबा विचार के लोगों को चाहिए कि हम आपसी मेल मिलाप छोड़ हमारी उन पीड़ित बहनों के लिए सोचे और हम परिस्थितियां अनुकूल होती है एक होकर वहां पर जाए और मणिपुर की बहनों को हौंसला बढ़ाए।

सम्मेलन के द्वितीय सत्र में सम्मेलन के संयोजक संजय राय, दिल्ली ने कहा कि नंदिनी की चर्चा आज देशभर में शुरू हो गई है क्योंकि बहनों का जागरण बहुत ही आवश्यक है। आज समाज में जो हिंसाए बढ़ रही है उसका कारण यही है कि हमारी बहनों की अशिक्षित होना, सीमित सोच और भयाक्रांत माहौल में दूसरों के आने का इंतजार करना। हमें भारत की सभी बहनों से कहना है कि हम सभी आपके साथ है और बहनों को चाहिए की वह आत्मनिर्भर बने और नेतृत्व की भूमिका का निर्वाहन करें। मेरा मणिपुर की बहनों से सम्पर्क लगातार हो रहा है और विनोबा विचार प्रवाह परिवार उनके लिए बहुत ही चिंतित है और जैसे ही अनुकुलता होती है हम एक प्रतिनिधि मण्डल को मणिपुर भेजने की योजना बना रहे है और सम्पूर्ण देश की विलक्षण प्रतिभा की धनी महिलाओं को हौंसला देने के लिए भेजा जावेगा। इस अवसर पर सम्पूर्ण देश ही नही विश्व में युवाओं को बाबा विनोबा एवं गांधी की विचारों से जोड़ने के महान कार्य को देखते हुए संजय राय को सेवाधाम विश्व युवा मैत्री सम्मान से श्रीमती कांता भाभी, रमेश भइया सहित गणमान्यजनों की उपस्थिति में प्रदान किया गया।
शिव सत्संग मण्डल के केन्द्रीय संयोजक अम्बरीष कुमार सक्सेना ने कहा कि आत्मज्ञान का प्रकाश मनुष्य को निरंतर आगे बढ़ाता है। हमारे सद्ग्रंथ, हमारी संत परंपरा एवं महापुरुषों का पुण्य प्रवाह हमारे जीवन को शक्तिशाली बनाता है। महात्मा गांधी और आचार्य विनोबा भावे ने सत्य,अहिंसा,शांति, सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश पूरी दुनिया को दिया।
सम्मेलन के अन्त में वाराणसी से पधारे अजय कुमार पाण्डे ने कहा कि विनोबा की इच्छा थी कि बहने शंकराचार्य की तरह प्रज्ञावान बने। काशी के नंदिनी शिविर में बद्रीका आश्रम के शंकाराचार्य ने अपनी दो शिष्याऐं शिविर में भाग लेने के लिए भेजी थी और ऋषिकेश शिविर में स्वयं उपस्थित रहने का अनुरोध स्वीकार किया। मुझे लगता है कि भविष्य में बाबा का सपना पूरा होगा और महिलाऐं भी शंकराचार्य की तरह प्रज्ञावान निकलेगी। पवनार के डाॅ. अशोक हिवरे, राधा डगवार, शांताजी महिला बैंक की चेयरमेन शुभांगी हिवरे ने भी बहनों की बचत की गई क्रांतिकारी योजना के बारे में बताया। इसके अलावा बिहार की राजोदेवी, खगड़िया की वर्षा रानी, आगा खान पैलेस से जुड़ी प्रतिमा बहन, हरियाणा की सविता सोनी बहन, उत्तराखण्ड की अनिता बिडालिया, महाराष्ट्र की कविना एनुरकर, इन्दौर की श्वेता गुप्ता, यश सौलंकी एवं सुन्दर लाल सुमन आदि वक्ताओं ने भी अपनी बात रखी। सम्मेलन का संचालन सीमा सिंह ने किया, सभी का आभार प्राची बहन ने दिया।

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